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वन्दे मातरम........!!

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पता नहीं क्यूँ.........??

Posted On: 19 Nov, 2012 में

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मुझे पता है मैं जो शिक्षा ले रहा हूँ वो मुझे गुलाम बनाने के लिए मेकॉले बना कर गया है….भारत में स्कूल कालेज और यूनिवर्सिटीज चलने का एक ही उद्देश्य है भारत के भविष्य को नस्ट कर दिया जाय किन्तु फिर भी मैं वही शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ…….यदि मैंने ऐसा नहीं किया अर्थात मेकॉले का गुलाम नहीं बना मैंने ऐसी शिक्षा ग्रहण नहीं की जो मुझे आर्थिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से नपुंशक बना दे तो भारत का तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग मुझे अनपढ़ अशिक्षित गवांर आवारा न जाने क्या क्या कहने लगेगा………..!!
मन में एक ख्याल आता है हमेशा कि क्यूँ कोई “अनपढ़ अशिक्षित गवांर कहे जाने वाला व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता, किसी को धोखा नहीं देता, किसी से विश्वासघात नहीं करता…….कम पाकर भी संतुस्ट रहता है, मोह, माया, लोभ, क्रोध, घृणा, अहंकार जैसे कुविकारों से मुक्त होता है…….प्रेम, दया, करुणा, क्षमा, शांति, आनंद और संतुष्टि को अपना जीवन समझकर देवत्व का जीवन जीता है……..भले ही आज का नपुंशक भारतीय बुद्धिजीवी वर्ग उसे अपमानित क्यूँ न करता रहे……..!!”
ठीक उसके विपरीत “एक शिक्षित डिग्रीधारी प्रोफेसर, इन्जिनिअर, डॉक्टर, वकील, अधिकारी ९९% शिक्षित व्यक्ति झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं, विश्वासघात करते हैं…..अधिक पाने की लालसा में दूसरों के पेट में लाथ मारते हैं मोह, माया, लोभ, क्रोध, घृणा, अहंकार जैसे कुविकारों से उनका चरित्र सुसज्जित होता है……….प्रेम का तो अर्थ ही नहीं पता होता उन्हें, दया, करुणा, क्षमा, शांति, आनंद और संतुष्टि ये सब तो टाइमपास है ………!!”
अब जिज्ञासा होती है मन में की ऐसा क्यूँ है क्यूंकि सच में जो अच्छे होते हैं वे कभी स्कूल नहीं गए और उनके पास पढने के लिए पैसे भी नहीं होंगे और जो शिक्षित डिग्रीधारी प्रोफेसर, इन्जिनिअर, डॉक्टर, वकील, अधिकारी नपुंशक मेकॉले के गुलाम हैं वे सभी स्कूल गए हैं……..अब स्कूल में क्या है मेकॉले की गुलामी तो इन्शान का जानवर राक्षस बनना स्वाभाविक है, भारत और भारतीय संस्कृति का नस्ट होना स्वाभाविक है……..!!

वर्त्तमान सन्दर्भ में देखा जाय तो भारत में सबसे असुरक्षित और खतरनाक जगह कोई है तो वो है स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटीज और सभी शिक्षा केंद्र…..भारत के वर्त्तमान और भविष्य की दुर्गति का कारण मेकॉले द्वारा बनाये गए यही गुलामी के शिक्षा केंद्र हैं…….किन्तु सभी जिम्मेदार सम्माननीय माँ पिताजी परिवारवाले अपने बच्चों को प्रतिदिन इन संवेदनशील स्थलों पर भेजते हैं………भारत का बच्चा बच्चा स्कूल्स में होने वाले प्रतिदिन होने वाले राष्ट्रीय अपराध का साक्षी और भुक्तभोगी है……..क्लास 10th तक आते आते हर विद्यार्थी अपने चरित्र कर्म और विचारों से गुलाम दूषित और क्लेशित हो जाता है……..99% विद्यार्थी गन्दी पश्चिमी संस्कृति को अपना सब कुछ मान लेते हैं जो अच्छे विद्यार्थी होते हैं, उन्हें मार्क्स के प्रतियोगिता में फंशा दिया जाता है उनकी भी बुद्धि भ्रस्ट हो जाती है, भारतीय संस्कृति की ऐसी की तैसी होने लगती है, बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड का खेल तो क्लास 5 से ही आजकल प्रारंभ हो गया है…….किशोर और युवा वर्ग सेक्स के मायाजाल में फंश कर अपना सब कुछ खो देता हैं……..नया ट्रेड आया है tution का, tution के नाम पर निकलते/निकलती हैं और कहीं ओर चले जाते/जाती है, भारत का भविष्य प्रारंभ होने से पहले ही समाप्त हो जाता है………..शिक्षा के नाम पर भारत के युवाओं को ही भारत के विनाश का कारण बनाया जा रहा है अभी जो पीढ़ी जवान हो रही है और आने वाले दस सालों में जवान हो जाएगी वो भारत के अंत का कारण बनेगी ये निश्चित है आज के 11 और 12 क्लास के लड़के और लड़कियों को सेक्स के अलावा कुछ नहीं आता, वे अपने आप को संभाल नहीं सकते घर, परिवार, राष्ट्र को कैसे संभालेंगे…….वहीँ दूसरी और प्रत्येक विद्यार्थी का परिवार अपने बच्चों को स्कूल और शिक्षा केन्द्रों में भेजकर निश्चिंत है शायद सोचते होंगे कुछ अच्छा बनेगा/बनेगी, कुछ अच्छा करेगा/करेगी, परन्तु सच कुछ ओर ही है, जो मैंने लिखा है……!!
मेकॉले का भूत भारत को नस्ट होता देख भारतीय संस्कृति की विकृति और भारतीय युवाओं के चारित्रिक पतन की खुशियाँ मनाता है……..वही आजाद के आंशु, नेताजी की विवशता, क्रांतिकारियों की आत्मा चीखती तड़पती नज़र आती है, कांप उठता है एक सच्चे भारतीय का मन, क्रोध की ज्वाला जलती है, खून के आंशु निकलते हैं, दिल पिघलता है पर शरीर वज्र बन जाता है ………………!!
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम…………!!

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ajaykr के द्वारा
December 4, 2012

प्रतिष् भाई बहुत दिन बाद …आपको मंच पर देखा …बहुत ही उम्दा और सार्थक lekhan

yogi sarswat के द्वारा
November 22, 2012

मैं कल श्री राजीव दीक्षित जी को सुन रहा था विडियो में ! प्रीतिश जी , मुझे नहीं लगता उनसे बड़ा देश भक्त कोई और हो सकता है ! सच कहूं तो , सिर्फ शिक्षा ही नहीं बल्कि अंग्रेजों ने इस देश की संस्कृति और अबिहावा को भी बर्बाद किया है ! आप हमेशा बेहतरीन , सामाजिक लेख इस मंच को दे रहे हैं , धन्यवाद आपका !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 21, 2012

प्रीतीश जी, saprem नमस्कार !….. बहुत दिनों बाद आप को parh रहा हूँ ! kahaan थे ? सुन्दर और सार्थक पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई !

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 20, 2012

उम्दा

Lahar के द्वारा
November 20, 2012

प्रिय प्रीतिश जी सप्रेम नमस्कार अच्छा लगा आपका लेख , अगर सभी भारतीय अगर आपके जैसा सोचते तो फिर बात ही क्या थी

akraktale के द्वारा
November 20, 2012

प्रीतिश जी सादर, कुछ लोगों कि मजबूरी है मगर अधिक तो खुश हैं ऐसे में बदलाव कि बयार अभी तो बहती नजर नहीं आती. आप के जन जागरण अभियान से शायद कुछ कि और विचारधारा बदले. वन्दे मातरम!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 19, 2012

आदरणीय प्रीतीश जी, सस्नेह बहुत अछि बात कही आपने, सोचने को मजबूर कर दिया. वाकई में में इन संस्थाओं से पढाई के बाद निकलने वाले छात्र कितने विकसित हुए, और किस क्षेत्र में विचारणीय है. बधाई.

    pritish1 के द्वारा
    November 19, 2012

    प्रणाम दादा जी आप दादा हैं फिर भी जी बोलते हैं मैंने अभी की सच्चाई लिखी है १००%

nishamittal के द्वारा
November 19, 2012

आपने शिक्षा प्रणाली के दोषों को सुन्दर रूप से प्रस्तुत किया है,परन्तु इससे पूर्व हमें सशक्त विकल्प तो तैयार करना होगा.

    pritish1 के द्वारा
    November 19, 2012

    विकल्प अपने आप मिल जायेगा सबसे पहले स्कूल्स बंद कर देने चाहिए मैं प्रतिदिन यही देख रहा हूँ ३-४ वर्षों से…….मैं स्वयं एक विद्यार्थी हूँ…….अच्छे बुरे सभी से सम्बन्ध है………..सबका मित्र हूँ मैं……….और सब एडवाइस भी लेते हैं अधिकतर प्रेमसंबंध जोड़ने और तोड़ने के ही……….!! स्थिति बहुत ख़राब है…………!! tution तो भेजना ही नहीं चाहिए लड़कियों को वन्दे मातरम जय आजाद

    ajaykr के द्वारा
    December 4, 2012

    प्रीतीश जी, एक समय था जब मैं भी १०+२ ,और गेजुयेशन कि कुछ कक्षाओं में रसायन शास्त्र पढाया करता था ..-[२०१० -२०११ ]ट्यूशन के संदर्भ में आपसे मैं सहमत हूँ पर… क्या हर जगह माहौल खराब हों? ऐसा भी जरुरी भी नहीं …पर वास्तव में मैं आपसे सहमत हूँ ..क्यूंकि माहौल में परिवर्तन बहुत तेज आया हैं आ रहा हैं ..भारतीय संस्कृति पर …नीच मिडिया ,फिल्मे और सरकार द्वारा प्रोमोशन देकर लगातार प्रहार किया जा रहा हैं | वास्तव में आपके लेखन ने मुझे सदैव प्रेरित किया हैं |


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