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वन्दे मातरम........!!

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सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.......!

Posted On: 28 Jul, 2012 में

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भारत स्वाभिमान आन्दोलन
100% राष्ट्रवादी चिन्तन, 100% विदेशी कम्पनियों का बहिष्कार व स्वदेशी को आत्मसात करके, देशभक्त लोगों को 100% संगठित करना तथा 100% योगमय भारत का निर्माण कर स्वस्थ, समृद्ध , संस्कारवान भारत बनाना – यही है “भारत स्वाभिमान” का अभियान । इसी से आएगी देश में नई आजादी व नई व्यवस्था और भारत बनेगा महान् और राष्ट्र की सबसे बडी समस्या – भ्रष्टाचार का होगा पूर्ण समाधान । जगत की दौलत – पद, सत्ता, रूप एवं ऐश्वर्य के प्रलोभन से योगी ही बच सकता है । योग न करने के कारण अर्थात योगी न होने से आत्मविमुखता पैदा होती है और आत्मविमुखता का ही परिणाम है – बेईमानी, भ्रष्टाचार, हिंसा, अपराध, असंवेदनशीलता, अकर्मण्यता, अविवेकशीलता, अजितेन्द्रियता, असंयम एवं अपवित्रता ।
हमने योग जागरण के साथ राष्ट्र – जागरण का कार्य आरंभ करके अथवा योग – धर्म को राष्ट्र – धर्म से जोड़ कर कोई विरोधाभासी कार्य नहीं किया है अपितु योग को विराट रूप में स्वीकार किया है । योग धर्म एवं राष्ट्र – धर्म को लेकर हमारे मन में कोई संशय, उलझन, भ्रम या असामन्जस्य नहीं है । हमारी नियत एवं नीतियाँ एकदम साफ है और हमारा इरादा विभाजित भारत को एक एवं नेक करने का है । योग का अर्थ ही है – जोडना । योग का माध्यम बना, हम पूरे राष्ट्र को संगठित करना चाहते है ।
हम देश के प्रत्येक व्यक्ति को प्रथमत: योगी बनाना चाहते है ।जब देश का प्रत्येक व्यक्ति योगी होगा, तो वह एक चरित्रवान युवा होगा, वह देशभक्त, शिक्षक व चिकित्सक होगा, वह विचारशील होगा, वह संघर्षशील अधिवक्ता होगा, वह जागरूक किसान होगा, वह संस्कारित सैनिक, सुरक्षाकर्मी एवं पुलिसकर्मी होगा, वह कर्तव्य – परायण अधिकारी, कर्मचारी एवं श्रमिक होगा, वह ऊर्जावान व्यापारी होगा, वह देशप्रेमी कलाकार होगा,561037_380808901985144_937266810_n_2
वह राष्ट्रहित को समर्पित वैज्ञानिक होगा,वह स्वस्थ, कर्मठ एवं अनुभवी वरिष्ठ नागरिक होगा एवं वह संवेदनशील न्यायाधीश-अधिवक्ता होगा क्योंकि हमारी यह स्पष्ट मान्यता है कि आत्मोन्नति के बिना राष्ट्रोन्नति नहीं हों सकती ।

योग करके एवं करवाकर हम एक इंसान को एक नेक इंसान बनाएँगे । एक माँ को एक आदर्श माँ बनाएँगे । योग से आदर्श माँ व आदर्श पिता तैयार कर राम व कृष्ण जैसी संताने फिर से पैदा हों, ऐसी संस्कृति एवं संस्कारों की नींव डालेंगे।
योग से आत्मोन्मुखी हुआ व्यक्ति जब स्वयं में समाज, राष्ट्र, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड व जीव मात्र को देखेगा तो वह किसी को धोखा नहीं देगा, वह किसी की निंदा नहीं करेगा क्योंकि वह अनुभव करेगा कि दूसरो से झूठ बोलना, बेइमानी करना व धोखा देना मानो स्वयं से ही विश्वासघात करना है, आत्म – विमुखता के कारण ही देश में भ्रष्टाचार, बेइमानी, अनैतिकता, अराजकता व असंवेदनशीलता है । हम इस सम्पूर्ण योग – आन्दोलन से इस धरती पर ॠषियों की संस्कृति को पुनः स्थापित कर सुख, समृद्धि, आनन्द एवं शांति का साम्राज्य लायेंगे ।
योगमय भारत का निर्माण कर स्वस्थ, समृद्ध ,स्वच्छ, स्वावलम्बी, भ्रष्टाचार – मुक्त, बेरोजगारी एवं गरीबी – मुक्त, संस्कारवान भारत बनाना – यही है “भारत स्वाभिमान” का अभियान ।
हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! एक स्वस्थ, समृद्ध एवं संस्कारवान् भारत बनाने का संकल्प लें…….

ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….!
जय हिंद जय भारत….वन्दे मातरम……!

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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pritish1 के द्वारा
August 7, 2012

यह मेरा आलेख नहीं भारत स्वाभिमान का उद्देश्य है…………उठो जागो क्यों सोये हो….? ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! वन्दे मातरम….जय हिंद जय भारत….जय भारत स्वाभिमान……..

yogi sarswat के द्वारा
August 7, 2012

बहुत ही सटीक , समसामयिक और रचनात्मक लेख दिया है आपने प्रीतिश जी ! योग , सच में जीवन के कष्टों का कुछ तो उपाय करता ही है ! बहुत ही सारगर्भित लेख ! बधाई

JAMALUDDIN ANSARI के द्वारा
August 6, 2012

प्रीतिश जी , नमस्कार सुन्दर लेख के लिए बधाई ऐसे ही लिखते रहिये .

    pritish1 के द्वारा
    August 7, 2012

    यह मेरा आलेख नहीं भारत स्वाभिमान का उद्देश्य है…………उठो जागो क्यों सोये हो ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! वन्दे मातरम….जय हिंद जय भारत….जय भारत स्वाभिमान……..

ashishgonda के द्वारा
August 4, 2012

मान्यवर प्रितीश भैया! आपने ये लेख लिखकर बहुत अच्छा और सराहनिए काम किया है, कुछ रामदेव जी को अन्ना जी को या और कोई भी उन्हें बहुत अच्छा मानते हैं कुछ कमियां बताते हैं, यही सबके साथ होता है- स्वयं राम के लिए लिखा गया है- “जिन्ह कें रही भावना जैसी प्रभु मूर्ति तिन्ह देखि तैसी” लेकिन मेरा ये मानना है की वो कैसे भी हो उसका कम अच्छा है जिससे हमारा भी लाभ होगा क्योंकि- “न तेरा है न मेरा है, ये हिन्दुस्तान सबका है, नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका है.” मैं उन्हें नमन करता हूँ. बहुत ही उन्दा आलेख जय-हिंद

    pritish1 के द्वारा
    August 5, 2012

    धन्यवाद……..आशीष भाई……..भैया मत कहिये हम हम उम्र हैं………

ajay kumar pandey के द्वारा
August 3, 2012

आदरणीय प्रतिष् जी आपकी देशभक्ति की भावना को देखकर मेरे में भी जोश पैदा हो गया है आपके देशभक्ति की भावना से प्रेरित आन्दोलन का में तहदिल से अभिवादन करता हूँ वैसे में आजकल के बाबाओं को भ्रष्ट ही समझता हूँ चाहे वह रामदेव हों या कोई हो हाँ यदि देश के लिए कोई भी सच्चे दिल से त्याग और बलिदान की भावना रखे तो में हर उस व्यक्ति का सम्मान करता हूँ जो देश के लिए मर मिटने को तैयार है धन्यवाद अजय पाण्डेय

    pritish1 के द्वारा
    August 4, 2012

    यह मेरा ही नहीं पुरे देश का आन्दोलन है……..प्रत्यक्ष रूप से भारत स्वाभिमानियों की शंख्या 50करोड़ से अधिक है………स्वामी जी एक अच्छे इंसान हैं और सच्चे देशभक्त……….आप स्वामी जी और स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित के व्याख्यान अवश्य सुने………हमारा उद्देश्य भारत बनना है………भारत जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान

vaidya surenderpal के द्वारा
August 3, 2012

स्वाभिमान पूर्ण भारत के निर्माण के लिए आवाज बुलंद करता आलेख …! धन्यवाद ।

    pritish1 के द्वारा
    August 4, 2012

    जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान………..ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! वन्दे मातरम……!

ambric04 के द्वारा
August 3, 2012

जय हो

Rajesh Dubey के द्वारा
August 2, 2012

सुन्दर भारत के लिए हम आपके साथ हैं. देश हित में योग का सहारा उत्तम है. मन सुन्दर तो विचार सुन्दर, फिर व्यवहार सुन्दर, निश्चित ही देश तरक्की करेगा.

    pritish1 के द्वारा
    August 3, 2012

    जय हिंद जय भारत……..वन्दे मातरम………!

alkargupta1 के द्वारा
July 31, 2012

देश प्रेम की भावना से परिपूर्ण बढ़िया आह्वान प्रीतिश जी …. जय हिंद जय भारत…वन्दे मातरम

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    धन्यवाद माता जी……. सादर प्रणाम……हमारे आन्दोलन का समर्थन कीजिये……. जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान…..

phoolsingh के द्वारा
July 31, 2012

जय हिंद जय भारत….वन्दे मातरम……सर,,,,,,,,फूल सिंह

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! 9 अगस्त को एक अन्तिम अल्टीमेटम, एक अन्तिम मौक़ा देंगें ये किसी भी आन्दोलन का एक चरण होता है परिवर्तन कोई भी कितना भी बड़ा हुआ हो पूरी दुनिया में उसे इस चरण से गुजरना ही पड़ता है और अबकी बार उन्हें अन्तिम मौक़ा दिया जा रहा है और कि तुम कालाध न लाओ ,भ्रष्टाचार मिटाओ देश को बचाओ और यदि तुम कालाधन लाते हो भ्रष्टाचार मिटाते हो देश को बचाते हो तो तुम्हारा स्वागत है यहाँ से शुरू होगा 9 अगस्त का आन्दोलन इसी वाक्य से शुरू होगा इसी विचारधारा से शुरू होगा इसी संकल्प के साथ शुरू होगा इसी आइडियोलोजी के साथ शुरू होगा इसी सिद्धान्त के साथ शुरू होगा के अब अन्तिम अल्टीमेटम है कि या तो अब लाओ और यदि तुम लाते हो तो हम तुम्हे श्रेय देने के लिए तैयार हैं और यदि तुम नहीं ले कर के आते हो कालाधन नहीं मिटाते हो भ्रष्टाचार नहीं बचाते हो देश को तो ये देश किसी सत्ता किसी पार्टी या किसी एक कुल, खानदान,घराने का नहीं है ये हम 121 करोड़ भारतियों का देश है और इसको बचाने के लिए हम इस देश में आ गए है हमारा वतन हमारे दिल में बस्ता है ये हमारे लिए माँ है और हम इसकी सन्ताने हैं हम इसकी बैटा-बेटियाँ हैं ,हम अपनी माँ की इज्जत आबरू को बर्बाद नहीं होने देंगें ! यहाँ से शुरू होगी ये प्रक्रिया …:- Swami Ramdev

shashibhushan1959 के द्वारा
July 31, 2012

आदरणीय प्रीतिश जी, सादर ! अच्छा आह्वान ! मेरी सहमति !

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    सरकार को अंतिम चेतावनी ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….!

dineshaastik के द्वारा
July 31, 2012

इसे जरूर पढ़े तथा अपनी प्रतिक्रिया दें- http://ausafmalik01.jagranjunction.com/?p=453किस राम राज्य की आशंका करते हैं हम

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    धन्यवाद आपका…….मैं हिंदुत्व के खिलाफ कुछ भी सुनना पसंद नहीं करता……..सांप्रदायिक हिंषा अलगाव फ़ैलाने के लिए इस तरह के लेख लिखने वाले लोग क्या समझेंगे हमारे राम को………

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 30, 2012

भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! एक स्वस्थ, समृद्ध एवं संस्कारवान् भारत बनाने का संकल्प लें……. सुन्दर संकल्प. आमीन

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    आवश्यकता है भारत के प्रत्येक व्यक्ति की……..ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! जय हिंद जय भारत….वन्दे मातरम……!

ajaykr के द्वारा
July 30, 2012

प्रीतीश जी,मैं योग का विरोधी नही हूँ ,योग करने से लोग सुधरते तो दिनों दिन अराजकता /अशांति /चोरी/हत्या / की घटनाये बढ़ती नही …जबकि आकडे बताते हैं की योग करने वाले दिनों दिन बढ़ रहें हैं ,दिल्ली के किसी भी रिहायसी कालोनी से आप सुबह गुजरोंगे तो सुबह सुबह फूं फ …..कपल बहती,अनुलोम विलोम आदि करने वाले तथा सुर्नाम्स्कार ,सर्वांगासन ,हलाशन करने वालो की एक बड़ी संख्या देखेंगे | सिर्फ योग करने से ही रोग मिटते तो आज हमारे अस्पताल में इतने रोगी नही आतें …..जो की दिनों दिन बढ़ रहें हैं | हा स्वामी का प्रयास सार्थक जरूर हैं …….कोको…पेप्सी …जैसे जहरो की बिक्री में आई कमी …..हैं ,योग करने से चरित्र का सम्बन्ध मेरे समझ में नही आया …………….जरूर समझाईये | एक माँ को आदर्श माँ योग कराके बनायेंगे थोड़ी बात समझ में नही आई …….माँ की UNCONDITIONAL LOVE में कंडीशन उत्पन्न करेंगे क्या ?????? मैं ऐसे अनेक पुलिस अफसरों ,डाक्टरों,अस्पताल मालिकों को देख चुका हूँ जो हर दिन योग करते हैं किन्तु घर लौटते हैं रात को तो उनके बैग गरीबो,कमजोरों के खून बेचकर कमाए हुए रुपये से भरे होते हैं …… जो भी हों योग एक सार्थक चीज हैं और हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी,मुझे अच्छा लगता हैं इसलिए योग करता हूँ ……किन्तु मेरा स्वास्थ्य मेरे मस्तिष्क के नियंत्रण में हैं …मेरा धन ,मेरा चरित्र ,मेरी सहिद्र्यता ,मेरी इमानदारी,मेरी खुद को और दूसरों को धोखा ना देने की प्रवृत्ति मेरे अपने मन के नियंत्रण में हैं |

    pritish1 के द्वारा
    July 30, 2012

    अजय जी नमस्ते…… योग के विषय में आपका ज्ञान अधूरा है इसका कारण आपकी और हम सब की शिक्षा है जो अंग्रेजों द्वारा हम सब पर आजादी के नाम पर थोप दी गयी है…….हमारा दुर्भाग्य है की हम अपनी ही भारतीय संस्कृति के विषय में आज तक कुछ सिख नहीं पाए हैं……और यही आपकी और पुरे भारत की अज्ञानता का कारण है……. योग सर्वत्र समर्पण है…….एक सच्चा योगी बेईमानी, भ्रष्टाचार, हिंसा, अपराध, असंवेदनशीलता, अकर्मण्यता, अविवेकशीलता, अजितेन्द्रियता, असंयम एवं अपवित्रता की पहुँच से बहुत दूर होता है…….योगी न होने से आत्मविमुखता पैदा होती है और आत्मविमुखता का ही परिणाम है – बेईमानी, भ्रष्टाचार, हिंसा, अपराध, असंवेदनशीलता, अकर्मण्यता, अविवेकशीलता, अजितेन्द्रियता, असंयम एवं अपवित्रता । आज समाज में योग करने वाले बढे हैं किन्तु योगी नहीं………. हम देश के प्रत्येक व्यक्ति को प्रथमत: योगी बनाना चाहते है और जब देश का प्रत्येक व्यक्ति योगी होगा, तो वह एक चरित्रवान युवा होगा, वह देशभक्त, शिक्षक व चिकित्सक होगा, वह विचारशील होगा, वह संघर्षशील अधिवक्ता होगा, वह जागरूक किसान होगा, वह संस्कारित सैनिक, सुरक्षाकर्मी एवं पुलिसकर्मी होगा, वह कर्तव्य – परायण अधिकारी, कर्मचारी एवं श्रमिक होगा, वह ऊर्जावान व्यापारी होगा, वह देशप्रेमी कलाकार होगा, वह राष्ट्रहित को समर्पित वैज्ञानिक होगा,वह स्वस्थ, कर्मठ एवं अनुभवी वरिष्ठ नागरिक होगा एवं वह संवेदनशील न्यायाधीश-अधिवक्ता होगा क्योंकि हमारी यह स्पष्ट मान्यता है कि आत्मोन्नति के बिना राष्ट्रोन्नति नहीं हों सकती । ध्यान से पढें नहीं तो आपको मेरी बात शायद समझ में न आये……….और कोई शंका है तो मैं उसे १००% दूर करने का प्रयत्न करूँगा……. प्रीतीश

    pritish1 के द्वारा
    July 31, 2012

    आदरणीय अजय जी, आप अब तक मेरे वाक्य ही समझ नहीं पाए हैं…….मैंने आपसे कोई प्रश्न किया ही नहीं आपने उत्तर दे दिए ….हो सकता है आप मेरी बात समझना नहीं चाहते आपकी आँखों में भ्रष्ट आधुनिकता की पट्टी जो बंधी है आपको अपने सभी प्रश्नों का उत्तर मिल जायेगा……..बाजारवाद की इस भ्रस्ट आधुनिकता की पट्टी को उतार फेंकिये………….किन्तु मैं आपको निराश नहीं करूँगा चरणबद्ध रूप से आपके प्रश्नों का उत्तर लिख रहा हूँ…… १. आपका पहला प्रश्न भारतीय संस्कृति क्या है? 4 वेद, 4 उपवेद, 6 वेदांग, 18 पुराण, अशंख्य उपनिषद (108 मान्यताप्राप्त) न्याय, मीमांशा, धर्मशास्त्र, …………….आदि आदि……इतनी और इससे भी बड़ी है भारतीय संस्कृति किसी कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर विश्व की किसी मशीन में इतनी क्षमता नहीं की भारतीय संस्कृति का पूर्ण संग्रहण कर सके………भारतीय संस्कृति को समेटना अशंभव है यदि किसी एक भाग को भी जान लिया तो जीवन सार्थक हो जाता है……संक्षेप में इतना ही कहूँगा अपनी संस्कृति के विषय में……. “वशुधैव कुटुम्बकम……!” आप किसी ज्ञानी से बस इन दो शब्दों का पूर्ण अर्थ पूछ लीजिये वो एक ग्रन्थ की रचना कर देंगे……..इतनी शक्ति है हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति में……… २.आपका भ्रम भ्रस्ट लोगो द्वारा फैलाई गयी भ्रांतियां और षड़यंत्र…….. आप जिस विषय की पढाई अभी कर रहे हैं वो आयुर्वेद से उत्पन्न हुआ है……..ऋग्वेद का उपवेद है आयुर्वेद…! आप जो पढ़ रहे हैं वो बाजारवाद के लिए है आज की भ्रस्ट आधुनिकता है जो अंग्रेजों ने बनायीं है……. यदि सच में चिकित्सक बनना चाहते हैं तो आयुर्वेद पढ़िए………स्वामी जी की कौन से डिग्री है किन्तु वो विश्व में उपस्थित सभी चिकित्सकों से महान है…..सम्पूर्ण विश्व में उनके चाहने वाले हैं…..उन्होंने पुन: भारतीय संस्कृति को जागृत करने का सफल प्रयत्न किया है और सम्पूर्ण विश्व उनके साथ है आपने जो भी उनके विषय में कहा है वो भ्रस्ट लोगो द्वारा फैलाई गयी भ्रांतियां है षड़यंत्र है भ्रम है आप भ्रम में रहिये……..स्वामी जी मेरे और सम्पूर्ण विश्व के लिए पूज्य हैं और रहेंगे…….. 3. शिक्षा के सभी प्रारूप संस्कृत से उत्पन्न हुए हैं और आने वाले वर्षों में भारत पुन: वैदिक शिक्षा का आधार बनेगा……….शिक्षा पाने के लिए किसी को संघर्ष नहीं करना होगा……..एक बड़ा परिवर्तन आएगा सम्पूर्ण जगत में………हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! पुन: भारत विश्वगुरु बनेगा…….हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति से……… जय हिंद जय भारत…….जय भारत स्वाभिमान……….

    ajaykr के द्वारा
    July 31, 2012

    प्रीतीश जी, ||आपके कथनानुसार || अगर मैं सच में चिकित्सक बनना चाहूँ  तो आयुर्वेद पढूं क्या बात हैं ,आजतक एक भी आयुर्वेदिक सर्जन मुझे नही मिला ,किडनी सर्जरी ,हार्ट सर्जरी ,न्यूरो सर्जरी का कोई आयुर्वेदिक सर्जन नही मिला |आपने लिखा हैं की मैं जों पढ़ रहा हूँ ,बाजारवाद हैं फिर आप एम्स के सामने तथाकथित योगियो को लेकर आने वालो मरीजो को रोको ….तथाकथित आयर्वेद चिकित्सको के खराब किये हुए केसों मृतप्राय ..रोगियो की सर्जरी मत होने दो….हिम्मत हैं तुम्हारी इस बाजारवाद को रोकने की?किस किस को मारोगे .और आयुर्वेद को बदनाम करोगे |.तुम्हारी तरह के ही लोग जब हार्ट अटैक से मृत्यु के मुह में पहुँचते हैं तो किसी तथाकथित आयुर्वेदिक चिकित्सक .के पास जाने की बजाय एम्स क्यों आते हैं ?जवाब दो क्यूँ नही खड़ी करते बिना बाजार वाद के चिकित्सको की फ़ौज |..आयुर्वेद का अपना महत्व हैं जैसे की हर चिकित्सा प्रद्धात्ति का होता हैं ….. हमारी संस्कृति महान हैं ……हैं ना ?सरेआम गुवाहाटी में संस्कृति के पुरोधा किसी बच्ची के साथ घिनौनी हरकते करते हैं ?तब तुम कहाँ गए थे |सरेआम नेता,तथाकथित नकली साधू संत ,अफसर बेईमानी करते हैं ,देवियों के पूजने वाले इस देश में देवी रूपेण महिलाओं के साथ बदसलूकी क्या यह भी हमारी संस्कृति में हैं? | तुम सबको बदलना चाहते हों??????????????मेरी मानो खुद से बदलाव शुरू करो??दूसरों को तुम नही बदल सकते ,बदल सकते हों तो केवल खुद को…..?????????

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    समस्या बस मेरी और आपकी नहीं है की स्वयं मैं परिवर्तन लाकर हम उसे सुलझा सकें………….समस्या सम्पूर्ण भारत की है……….सेकड़ों वर्षों की गुलामी और अंग्रेजों के षड़यंत्र ने हमारी संस्कृति को मार दिया है………किन्तु हमारी संस्कृति अब भी जीवित है……..स्वामी रामदेव के प्रयासों से यह पुन: एक नए वेग से उर्जावान होने लगी है…………अपनी संस्कृति और भारत के लिए कुछ करूँ यह मेरा कर्तव्य है ……और मैं अपने कर्तव्य का पालन करने का प्रयत्न कर रहा हूँ………किन्तु आपको क्या पड़ी है……….आप तो डॉक्टर बनने वाले हैं……आप तो बस अपनी संस्कृति के विषय मैं ही मुझसे ५० प्रश्न पूछेंगे……और आपको संतोषजनक उत्तर देने के बाद भी………..बाजारवाद की संस्कृति को सही कहेंगे………और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आपने जो भी कहा है उसका कारण केवल और केवल अंग्रेजों का षड़यंत्र और बाजारवाद है………आज समाज भ्रस्ट लोगों से भर गया है रोगियों से भर गया है………..आयुर्वेद मृतप्राय है…………और हमारा यही तो प्रयास है की हम अपनी संस्कृति को पुन: विश्व की महाशक्ति बनाये………..हम सबको बदलना नहीं चाहते सबमे सबके मानसिक चिंतन में बदलाव लाना चाहते हैं…………हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! पुन: भारत विश्वगुरु बनेगा…….हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति से……… यह हमारा कर्तव्य है और मैं अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हूँ………किन्तु आप भाग रहे हैं अपने कर्तव्य से…मैं कैसे भाग जाऊं…..नहीं भाग सकता……आपने ज्ञान देने का प्रयत्न किया इसका धन्यवाद……. जय हिंद जय भारत…….जय भारत स्वाभिमान………. प्रीतीश

    pritish1 के द्वारा
    August 3, 2012

    आप अब भी समझ नहीं पा रहे हैं क्यूंकि आप भारतीय संस्कृति से पूर्णत: अपरिचित हैं मैं किसी पर दोषारोपण नहीं कर रहा हूँ…………मैं तो दोष सम्पूर्ण व्यवस्था को दे रहा हूँ जो हमारी है ही नहीं……..और आज यही कारण है की alopathy आयुर्वेद पर प्रभावी है किन्तु यदि गुणवत्ता देखि जाये तो आयुर्वेद से ऊपर कोई है ही नहीं……..फिर हमें alopathy को अपनाने की क्या आवश्यकता पड़ी……तर्कहीन बातें आप कहें जा रहे हैं भारतीय संस्कृति के विषय में सामान्य सी कोई पुस्तक ही आप पढ़ लीजिये या समय है तो पूज्यनीय श्री राजीव दीक्षित के दिए गए व्याख्यान सुन लीजिये आपको मेरी बात समझ में आ जाएगी…………बेकार के तर्क मत दीजिये………क्यूंकि आप पैसों में सब तौलते हैं क्यूंकि लोर्ड मेकोले की शिक्षा यही सिखाती है और हमारी संस्कृति में राष्ट्रहित सर्वोपरि है …………मैंने आपका विरोध किया ही नहीं मैंने अपनी संस्कृति को सर्वोपरि कहा है……….और भारतीय संस्कृति सर्वोपरि है…….और हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान………

manoranjanthakur के द्वारा
July 30, 2012

100 फिसिदी मेरा भी अविनंदन सुंदर रचना पर

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    मेरी रचना नहीं है………यह भारत स्वाभिमान का उद्देश्य है……….और हमारा आह्वान है सम्पूर्ण राष्ट्र से……..ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान….वन्दे मातरम……!

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 29, 2012

रोगी को बनाना है योगी भोगी को बनाना है योगी और योगी को बनाना है जोगी (जिसको पैसे का मोह ना हो ) किसी भी नेता का चरित्र जितना ज्यादा प्रेरणादायक होगा जनता उतना ही ज्यादा उसके पीछे चलेगी बदलाव की आशा में एक भारतीय :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) जय श्री कृष्ण जी

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    परिवर्तन होगा किन्तु अब आशा नहीं क्रांति चाहिए………..आन्दोलन का समर्थन कीजिये ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान….वन्दे मातरम……!

Dr. Anwer Jamal Khan के द्वारा
July 29, 2012

आत्मोन्नति के बिना राष्ट्रोन्नति नहीं हों सकती । सही कहा है.

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    सम्पूर्ण भारत इस आन्दोलन मैं सम्मिलित है आप भी समर्थन करें………. ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान….वन्दे मातरम……!

D33P के द्वारा
July 29, 2012

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है । सुन्दर आलेख……..के साथ आव्हान

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    ९ अगस्त निर्णायक आन्दोलन………जय हिंद जय भारत

jagojagobharat के द्वारा
July 29, 2012

सुन्दर आलेख .बाबा राम देव जी की जय हो .में पूरी तरह इस आन्दोलन के साथ हु

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    मेरा आलेख नहीं है………..यह उद्देश्य है हमारे भारत स्वाभिमान आन्दोलन का……..९ अगस्त अवश्य आयें दिल्ली के रामलीला मैदान………जय हिंद जय भारत

dineshaastik के द्वारा
July 29, 2012

प्रतीश जी आपकी देशभक्ति भावना को नमन…. वन्देमातरम्…… इंकलाब जिन्दावाद…..

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    वन्देमातरम्…… इंकलाब जिन्दावाद…..

Santosh Kumar के द्वारा
July 28, 2012

वन्देमातरम..जय हिंद जय भारत पूर्ण समर्थन ,..सादर अभिनन्दन

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    वन्देमातरम..जय हिंद जय भारत

Chandan rai के द्वारा
July 28, 2012

प्रीतिश जी , हमें देशभक्त होना चाहिय और देश के विकास पर एकजुट होना चाहिय , मे इस मूल मुद्दे पर आपसे सहमत हूँ !

    pritish1 के द्वारा
    August 1, 2012

    सहमती के साथ आपकी क्रांति चाहिए जय हिंद जय भारत………


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