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क्यों बनाया हमने ऐसा समाज..........?

Posted On: 7 Jul, 2012 में

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कहते हैं “आज सुखी वही है जो कुछ नहीं करता,जो कुछ भी करेगा, समाज उसमे दोष खोजने लगेगा उसके गुण भुला दिए जायेंगे और दोषों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जायेगा……प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दोषी है दोष किसमे नहीं होते……आज यही कारण है कि हर कोई दोषी अधिक दिख रहा है गुणी या ज्ञानी किंचित ही दिखाई पड़ते हैं……….”
परिणाम यह है कि हमारे भारतवर्ष में यदि कोई कुछ अच्छा करे तो इतना नाम नहीं पा सकता जितना कोई अनुचित कार्य कर पा सकता है……वातावरण विभिन्न दोषों कि अशुद्धियों से बीमार है………..हमने दोषों में आनंद लेना प्रारंभ किया है……आदर्शों का मजाक बनाने में हम तत्पर हैं……हम विलाशिता के जीवन की ओर अग्रसर हैं….दोष निकालने में व्यस्त हैं…..मोह, माया, काम, क्रोध, झूठ जैसे बुराइयों की वृद्धि हुई हैं…………दोष ओर बुराई के सजग वायरस ने हमें अँधा कर दिया है……….अच्छाई कहीं दिखाई ही नहीं पड़ती……..सच्चाई एक संघर्ष बनी हुई है……….
Ideal-Life
कोई अच्छा करने का प्रयत्न करे तो मिलकर उसकी टांगे खीच ली जाती हैं…….ईमानदारी से मेहनत कर जीविका चलाने वाले व्यक्ति समाज की अंधी व्यवस्था में पिस रहे हैं……? झूठ फरेब और भ्रस्टता का आवरण ओढ़े लोग अपनी बुराई की शक्ति से फल फूल रहे हैं………हमारे सम्पूर्ण व्यवस्था में सत्ता में बैठे लोग महाभ्रस्ट हैं और उनसे नीचे उनके भ्रष्ट सेवक……..
बुराई और दोष की प्रवृति ने अपना सर्वश्रेस्ट कुरूप धारण किया है जो जितना बुरा करने में समर्थ है वह उतना श्रेष्ठ है…..ईमानदारी मुर्खता माने जाने लगी है सच्चाई और अच्छाई के प्रति हमारी आस्था हिलने लगी है………
हमारे समाज का यह रूप अत्यंत प्रलयंकारी है……….अपनी बुराई और भ्रस्ठ मानसिकता में व्यक्ति अपने कुकर्मों से प्रसन्न है …..हम और आप भी honest नहीं बनना चाहते, सच बोलने से हमें डर लगता है……अच्छा करने का प्रयत्न व्यर्थ लगने लगा है…….यहाँ न सच्चाई है और न अच्छाई…………..क्यों बनाया हमने ऐसा समाज………?

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

smtpushpapandey के द्वारा
July 18, 2012

प्रीतिश जी सबसे पहले तो आपका बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी जो आपने मुझे समय निकालकर प्रतिक्रिया दी जी हाँ हमें सभ्य और सुशिक्षित समाज बनाने की जरुरत है धन्यवाद

groundbreaker के द्वारा
July 16, 2012

काफी अच्छा है यह पोस्ट | अब जरुरत आ गई है की हम अपने समाज को बेहतर बनायें, झूट और फरेब की इस भूल भुलैया से भर निकलें | मुझे संपूर्ण विश्वास है कि हममें अभी भी सच्चाई, ईमानदारी और समाज के लिए कुछ करने कि इच्छा बची हुई है | बस जरुरत है तो इसे बिना किसी डर के, बिना किसी झिझक के समाज के सामने प्रस्तुत करने कि |

    pritish1 के द्वारा
    July 17, 2012

    आशा है जल्द ऐसा हो……..हम ऐसा करने मैं सक्षम हों……….. आपके विचारों के लिए धन्यवाद प्रीतीश

akraktale के द्वारा
July 9, 2012

प्रीतिश जी नमस्कार, आपके साथ बहुत दूर तक मै सहमति लिए नहीं चल सकता क्योंकि हमारे यहाँ अच्छे काम करने वाले का नाम होता है और बुरा काम करने वाले का नाम बदनाम होता है. आप भ्रमित इसलिए हैं की हमारा मीडिया प्राथमिकता उसको देता है जो बिकता है. आप इस तरह समझें की यदि आप बाजार में एक तरफ स्राजनशील साहित्य और एक तरफ अश्लील साहित्य विक्रय के लीये लेकर बैठेंगे तो स्रजनशील साहित्य के खरीददार यदा कडा ही मिलेंगे जबकि अश्लील साहित्य हाथों हाथ बिक जाएगा. हमारा मीडिया भी इसी से प्रेरित है.आपका कहना की गलती उसी से होगी जो कुछ काम करेगा बिलकुल सही है. हमारा समाज आज भी अच्छाई को ही महत्त्व देता है मगर मुश्किल ये है की यह समाज सिकुड़ रहा है.

    pritish1 के द्वारा
    July 11, 2012

    आप मुझसे अनुभवी हैं मैं आपके विचारों का सम्मान करता हूँ किन्तु आज समाज मैं आगे वही है नाम उसी का है सम्मान उसीका है…….जिसके पास रिश्वत देने के लिए पैसे हैं…….गलत काम करने के लिए समय है………..बहुत कुछ ऐसा है जिसे आप मुझसे बेहतर जानते हैं……………..! आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का आभारी हूँ………धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
July 9, 2012

हम और आप भी honest नहीं बनना चाहते, सच बोलने से हमें डर लगता है……अच्छा करने का प्रयत्न व्यर्थ लगने लगा है…….यहाँ न सच्चाई है और न अच्छाई…………..क्यों बनाया हमने ऐसा समाज………? समाज की हकीकत और उसके दोष को स्पष्ट करता हुआ लेख है आपका प्रीतिश जी ! बहुत सटीक लेखन दिया है आपने !

    pritish1 के द्वारा
    July 11, 2012

    मित्रवर आपके आगमन का आभारी हूँ……..!

ajaykr के द्वारा
July 9, 2012

मित्र प्रीतीश,सादर अभिवादन , मन वचन और कर्म की एकरूपता ही सच्ची आध्यामिकता हैं |कोई भी महान व्यक्ति यश के लिए कार्य नही करता क्यूंकि जब सिर्फ यश के लिए कार्य किया जाता हैं तो शायद वह इतनी गुणवत्ता का नही हों पता जितनी “कार्य से प्रेम” की भावना से किया गया कार्य होता हैं | जीवन के दो पहलू हैं सकारात्मक या नकारात्मक !और रिमोट हमारे हाथ में हैं |या तो हम सकारात्मक होते हैं या नकारात्मक बिच में कुछ नही हैं | हर व्यक्ति का समाज को देखने का अपना चश्मा होता हैं .कुछ लोगों को लगता हैं की बुरा कार्य करके प्रसिद्द हों सकते हैं जैसे सायको रेपिस्ट ,बड़े चोर ……… कुछ लोग हमेशा अच्छा कार्य करना चाहते हैं ,अच्छाई भी प्रसिध्ही दिलाती हैं भाई ….जैसे बड़े डॉ ,लेखक ,पूर्व राष्ट्रपति कलाम | सच्चाई संघर्ष तो हैं किन्तु स्थायित्व की नीव भी हैं |सच्चाई की बुनियाद पर जो भवन बनता हैं टिकाऊ होता हैं | समर में घाव खाता हैं , उसी का मान होता हैं || छिपी उस वेदना में | अम्र वरदान होता हैं || सृजन में चोट खाता हैं | छेनी और हथोरी से | वाही पाषाण कही मंदिर में | भगवान होता हैं | |हमे जीवन में सिर्फ और सिर्फ वही मिलता हैं जो हम दूसरों को देते हैं |जीवन में आकर्षण का नियम के लिए सिर्फ हम हैं बस |अच्छाई किसी को देंगे ,प्रेम देंगे तो प्रेम का वृक्ष खुद में सर्वप्रथम अंकुरित होंगा | अच्छा लेख ,लिखते रहिये |

    pritish1 के द्वारा
    July 9, 2012

    आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का आभारी हूँ………. मैंने आपकी प्रतिक्रिया के जैसे ही एक कहानी पोस्ट की थी……. जीवन एक गूंज है……..?

    ajaykr के द्वारा
    July 11, 2012

    धन्यवाद,मेरे ब्लॉग पर आईये …

Chandan rai के द्वारा
July 8, 2012

मित्र , अपनी स्वार्थपरता से ही कुछ सामाजिक नुमाइंदो ने अपने झूटे सिद्धांतो से लोगो को बरगला समाज की ये हालत कर दी है , पर इसकी हालत ठीक हो सकती है यदि मे और आप अपना स्वार्थ छोड़ सच्ची राह पर निकले , जो सर्वजन समभाव को मानती हो !

    pritish1 के द्वारा
    July 9, 2012

    सच है चन्दन जी……… मैं भी यही मानता हूँ……..! धन्यवाद……!

drbhupendra के द्वारा
July 8, 2012

हमें अपना कर्त्तव्य कर्म आत्मा की आवाज पर करना चाहिए…. दुनिया का काम है की आप के कर्त्तव्य कर्म में बाधा डाले…

    pritish1 के द्वारा
    July 9, 2012

    किन्तु दुनिया क्या है……यह समाज क्या है….इसके अंग और निर्माता तो हम ही है न………हो सकता है जाने अनजाने मैं हम और आप भी यही करते हों……….आवश्यकता तो स्वयं को बदलने की है…….. मित्रवर आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी……….हमें अपना कर्त्तव्य कर्म आत्मा की आवाज पर करना चाहिए…. ! धन्यवाद…….!

yamunapathak के द्वारा
July 8, 2012

“आज सुखी वही है जो कुछ नहीं करता,जो कुछ भी करेगा, समाज उसमे दोष खोजने लगेगा उसके गुण भुला दिए जायेंगे और दोषों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जायेगा……प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दोषी है दोष किसमे नहीं होते……आज यही कारण है कि हर कोई दोषी अधिक दिख रहा है गुणी या ज्ञानी किंचित ही दिखाई पड़ते हैं……….”(श्वेत +श्याम रंगों के मिश्रण पर ध्यान देना है रंग हलके उभरे तो बहुत अछा,गहरे उभरे तो आत्मविश्लेषण की ज़रूरत है.)ब्लॉग(जीवन है सरल) प्रीतिश्जी,आपने मेरे ब्लॉग की कुछ पंक्तियों पर खासा ध्यान नहीं दिया.आपके द्वारा पूछे गए प्रत्येक प्रश्न का ज़वाब आपको प्राप्त होगा यह मैं आशा करती हूँ.

bharodiya के द्वारा
July 8, 2012

प्रितिश तुम्हारे पास अभी बहुत वक्त है कर गुजरने के लीए । ईस उमर में फिलोसोफी में मत उलज जाओ । तुम्हारा ध्यान बंट जायेगा । स्पर्धा का जमाना है । पढाई में पिछे जाओगे । तुम्हारी प्राथमिकता पढाई है ।

    pritish1 के द्वारा
    July 9, 2012

    आपका धन्यवाद……….!

Dr. Anwer Jamal Khan के द्वारा
July 8, 2012

नाम देखकर न्याय की परिभाषा बदल दी जाती है। हरेक झटका इन्हें जगाने के लिए दिया जाता है कि सबको एक पैमाने से नापो ! झटका लगा है तो कुछ न कुछ लोग जागे भी ज़रूर होंगे। जो जागेगा वही पाएगा। ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्यवरान्निबोधत’ उठो, जागो और श्रेष्ठ वस्तुओं को प्राप्त करो .

shashibhushan1959 के द्वारा
July 8, 2012

आदरणीय प्रीतिश जी, सादर ! कोई भी व्यवस्था दिशा निर्देशों पर चलती है ! दिशा निर्देश नेतृत्व करने वाला देता है ! दुर्भाग्य से ये नेतृत्व करनेवाले स्वयं दिशाहीन हैं, जिसका घातक परिणाम हमें भुगतना पड़ता है ! आपके इन मासूम प्रश्नों का उत्तर कौन देगा ? जिन्हें देना है, वे तो खुद प्रश्नों के घेरे में हैं !

    pritish1 के द्वारा
    July 8, 2012

    शशि जी………आपसे सहमत हूँ….किन्तु दांव पर तो हमारा देश है……….मेरे जैसे वो सभी विद्यार्थी है…..सभी सच्चे भारतीय है…………अच्छे इंसान है………..क्यूँ हमने ऐसा नेतृत्व चुना……….? कुछ तो करना चाहिए………..परिवर्तन तो आवश्यक है……….यदि परिवर्तन नहीं हुआ तो हर व्यक्ति असुरक्षित है………..

    pritish1 के द्वारा
    July 8, 2012

    हमने ही वो समाज बनाया जहाँ न अच्छाई है और न सच्चाई…………….हम ही वो समाज बना सकते हैं जहाँ सच्चाई होगी और अच्छाई भी………….!

dineshaastik के द्वारा
July 7, 2012

प्रितीश जी बहुत अच्छे सवाल उठाये हैं आपने, क्या वर्तमान स्थिति के लिये हम जिम्मेदार नहीं हैं? हम क्यों नहीं स्वयं बदलने की सोचते? दूसरे के बदलने की उम्मीद करते हैं। जब हम सुधरेंगे, तभी समाज सुधरेगा। जागृत करने वाले आलेख की प्रस्तुति के लिये हृदय से आभार……

    pritish1 के द्वारा
    July 8, 2012

    आदर सहित………. आपका आभारी हूँ कि आपने विचार व्यक्त किये………आशा करता हूँ वो दिन जल्द आये जब हम सुधर जायें और समाज सुधर जाये………………….! प्रीतीश

yamunapathak के द्वारा
July 7, 2012

यह azeeb saa sanyog hai ki aaj hee maine isee vishay se milatee julatee baaton kaa samaadhaan rakhaa hai.aapse request hai jeevan hai saral avshya padhein thanx

pritish1 के द्वारा
July 7, 2012

क्या कोई परिवर्तन संभव नहीं………आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में………. धन्यवाद……..!

nishamittal के द्वारा
July 7, 2012

ऐसा ही नहीं आज के मातापिता को नैतिक संस्कार देने में रूचि कम रखने लगे हैं,और उनका कहना है कि ऐसा बच्चा समाज में survive कैसे कर सकता है .

    pritish1 के द्वारा
    July 7, 2012

    आपके विचारों से सहमत हूँ………किन्तु क्या कोई परिवर्तन संभव नहीं……..!……..मैं 17 वर्ष का हूँ……..कुछ करना चाहूं तो मेरा अपना भविष्य संकट में आएगा……..हो सकता है यह समाज मुझे आतंकवादी कहे…….!


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