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ऐसी ये कैसी तमन्ना है ....

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ऐसी ये कैसी तमन्ना है ….

जून का महिना था दोपहर का समय और धूप कड़ी थी, विद्यालय में मास्टर साहब शारीरिक करवा रहे थे, मास्टर साहब ने विद्यार्थियों को डबल मार्च करने का आर्डर दिया लड़कों की लाइन ने एक चक्कर ही पूरा किया था की अनंतराम गिर पड़ा.. imgad_2
मास्टर साहब ने लड़कों को लाइन से जाने को कहा, दो लड़कों के साथ अनंतराम को उठाया और बरामदे
पर ले गए, मास्टर साहब ने एक लड़के को दौंड कर पानी लेन का हुक्म दिया दो- तीन लड़के स्कूल की
कापियां लेकर अनंतराम को हवा करने लगे, उसके मुंह पर पानी की बुँदे छिड़क दी गयी अनंतराम के
ठीक होते होते हेडमास्टर साहब भी आ गए और सके सर पर हाथ फेर कर तस्सली देने लगे एक
चपरासी टेम्पो ले आया और मास्टर साहब उसके घर जाने की व्यवस्था करने लगे स्कूल भर में अनंतराम
के बेहोस होने की खबर फैल गयी सब लोग उसे जान गए………
विद्यार्थियों के धूप में मार्च करते समय गुरुदास अनंतराम से दो लड़कों के बाद था यह घटना और यह घटना और कांड हो जाने के बाद वह पूरा दिन सोचता रहा यदि अनंतराम की जगह वह बेहोस होकर गिर पड़ता, वैसे ही उसे चोट आ जाती तो कितना अच्छा होता आह भरकर उसने सोचा सबलोग उसे जान जाते और उसकी खातिर होती ………….
श्रेणी में भी गुरुदास की कुछ ऐसी ही हालत थी गणित में गुरुदास बड़े यत्न से अपनी कापी पर दिमाग गड़ा देता, गुना या भगा कर उत्तर तक पहुँच ही रहा होता की बनवारी या रामू सवाल पूरा कर खड़ा हो जाता., गुरुदास का उत्साह भंग हो जाता मास्टर साहब शाबासी देते तो रामू और बनवारी को,…….. वहीँ रामलाल और लाला न तो सवाल पूरा करने की इच्छा रखते और न ही मास्टर साहब के डांटने पर लज्जित होते डांट मिलती तो रामलाल और लाला को….नाम जब भी लिया जाता तो रामू, बनवारी, रामलाल और लाला का.. गुरुदास बेचारे का कभी नहीं….
‘कुछ अच्छी शिक्षा के लिए पुरस्कार पाते तो कुछ अपनी बदमासी के लिए सबके आगे बेंच पर खड़े कर दिए जाते बेचारा गुरुदास इन दोनों के बीच लटका रह जाता’…………..
इतिहास में गुरुदास की विशेस रूचि थी, शेरसाह सूरी और अशोक का शोर्य, और अकबर के शासन का वर्णन उसके मस्तिस्क में चक्कर काटते रहते …..कभी शिवाजी का किला विजय उसके सच्चित्र होकर सामने आ जाता…. वह अपने आप को अपनी कल्पना में शिवाजी की तरह ऊँची नोकदार पगड़ी पहने, छोटी दाढ़ी और वैसा ही चोगा पहने ,तलवार लिए सेना के पहले घोड़े पर दोंड़ता चला जाता देखता……………………………………………….
इतिहास को मनस्थ कर लेने या स्वयं समां जाने के बाद भी गुरुदास को इनके तारीख याद नहीं रहते…. परिणाम यह होता की गुरुदास को इतिहास के क्लास में भी शाबासी मिलने या उसका नाम पुकारे जाने का समय न आता सबके सामने अपना नाम सुनने की गुरुदास के छोटे से ह्रदय की आकांशा इतिहास के उन पन्नो के बीच रोंती, सिसकती, घुटती नज़र आती.. पुन: इतिहास के मास्टर साहब का यह कहते रहना की दुनिया में लाखों लोग मरते जाते हैं, किन्तु जीवन उन्ही लोगों का होता है ,जो मर कर भी अपना नाम जिन्दा छोड़ जाते हैं……..गुरुदास के सिसकते ह्रदय को एक और चोट पहुंचा देता……………………

क्या गुरुदास अपने जीवन में कुछ कर पाता है क्या उसके अपने नाम सब के सामने आने की महत्वाकान्षा पूरी होती है……. ?
जानने के लिए देखें अगला अंक…….ऐसी ये कैसी तमन्ना-२……..

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44 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
November 12, 2012

प्रीतिश जी आपके अतीव सार्थक,सुन्दर एवं रोचक आलेख हेतु दीपाबली की समस्त मंगलमय शुभकामनाओं . .हेतु हार्दिक वधाई …अगले अंक की प्रतीक्षा …………….सुषमा गुप्ता

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 3, 2012

प्रीतिश जी अगले अंक की प्रतीक्षा में इस अंक के लिये बधाई ,,,,बहुत सुंदर आलेख

nishamittal के द्वारा
August 1, 2012

बहुत अच्छी कथा अगला अंक पढेंगें

ashishgonda के द्वारा
July 17, 2012

आपकी लेखनी में जादू है,,, बहुत खूब अगले की प्रतीक्षा में रत,,,,,,, आशीष

    pritish1 के द्वारा
    July 17, 2012

    अगला आलेख मेरे ब्लॉग में है मित्र आशीष……….आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद……!

seemakanwal के द्वारा
July 12, 2012

प्रीतिश जी अगले अंक की प्रतीक्षा में .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 28, 2012

सबके सामने अपना नाम सुनने की गुरुदास के छोटे से ह्रदय की आकांशा इतिहास के उन पन्नो के बीच रोंती, सिसकती, घुटती नज़र आती.. पुन: इतिहास के मास्टर साहब का यह कहते रहना की दुनिया में लाखों लोग मरते जाते हैं, किन्तु जीवन उन्ही लोगों का होता है ,जो मर कर भी अपना नाम जिन्दा छोड़ जाते हैं प्रीतिश जी अच्छा लेख और धारावाहिक है आप का ये तमन्ना तो कहीं न कहीं सब के दिल में उठ्ठी ही है नाम सब कमाना चाहते हैं बाधाएं आती हैं कुछ रोड़े भी ..आइये स्व को पहचाने और कुछ अपनी रूचि को जान ऐसा कर जाएँ ताकि दुनिया जाने माने प्यार ही प्यार … सुन्दर ..लिखते रहें … भ्रमर ५

    pritish1 के द्वारा
    June 29, 2012

    भ्रमर जी धन्यवाद……….. प्रीतीश

yamunapathak के द्वारा
June 28, 2012

ek vidyaarthee की pahachaan paane की swaabhaavik ichhaa ko bahut achee tarah aapne apnee lekhanee mein samet liya hai. kramasah की प्रतीक्षा रहेगी. शुक्रिया प्रीतिश जी

    pritish1 के द्वारा
    June 29, 2012

    यमुना जी मैंने कहानी के दो और भाग प्रकशित कर दिए हैं………मेरे प्रोफाइल मैं ध्यान से देखें…… धन्यवाद………!

rajanidurgesh के द्वारा
June 27, 2012

सच है. यह अक्सर होता है. और मुझे लगता है सभी के साथ होता है. नाम का शौक सभी को है. और सुनाम न मिले तो लोग कुनाम की चाहत करने लगते हैं. आप अच्छा लिखते हैं. अगला अंक भी पढना चाहूंगी. डा.रजनी.

    pritish1 के द्वारा
    June 27, 2012

    रजनी जी अगला अंक अवश्य पढ़िए…….मेरे ब्लॉग मैं उपलब्ध है………. मैंने इसके अगले दो अंक प्रकाशित किये हैं ऐसी ये कैसी तमन्ना है……….२ ऐसी ये कैसी तमन्ना है………३ आपके विचारों की प्रतीक्षा में

ashu के द्वारा
June 27, 2012

बहुत ही रोचक और सत्य कहानी है .. आपका लेखन अच्छ लगा ,लिखते रहें धन्यवाद………!

    pritish1 के द्वारा
    June 27, 2012

    आशु जी…….मैंने इस कहानी के दो भाग और प्रकाशित किये हैं कहानी के अगले भाग अवश्य पढें ऐसी ये कैसे तमन्ना है……..२ ऐसी ये कैसी तमन्ना है…….3 आपके प्रतिक्रियाओं के प्रतीक्षा में…….. धन्यवाद…….!

rekhafbd के द्वारा
June 23, 2012

प्रतीश जी ,हर बच्चा अपने आप में विशेष होता है ,बस उसे किसी के हल्के से संबल की जरूरत होती है ,गुरुदास के सिसकते हृदय पर पड़ रही चोटे हमारी शिक्षा प्रणाली की देन है ,आपका लेखन अच्छ लगा ,लिखते रहें

mayankkumar के द्वारा
June 18, 2012

आप की कहानी पद कर मन प्रसन्न हुआ …… कसे छात्र जीवन में प्रसंग हुआ करते हैं !!!!!!! बेहतर लेख ……. ज़ारी रखें !!!

    pritish1 के द्वारा
    June 19, 2012

    मित्रवर आप यहाँ आये प्रसन्न हूँ कहानी का अन्य भाग पढें और मुझे अपने सुझावों से अवगत करायें…. धन्यवाद………!

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

मैंने प्रतिष् जी , पहले आपकी दूसरी वाली रचना पढ़ी , लेकिन जब ये हाथ आई तो उसे दोबारा जोड़ कर पढ़ा ! बेहतरीन लेखन है आपका ! आपकी कल्पना शक्ति गज़ब की है !

nishamittal के द्वारा
June 18, 2012

आपके लेखन में कुछ यूँ ही अच्छा और नया मिलता रहे शुभकामनाएं.

    pritish1 के द्वारा
    June 19, 2012

    निशा जी……… आपके आगमन का आभारी हूँ….. मेरी रचनाओं में अपने सुझाव देते रहिये कहानी का अगला भाग भी ब्लॉग पर उपलब्ध है……….! धन्यवाद……..!

umeshshuklaairo के द्वारा
June 17, 2012

अति सुंदर लेखन

    pritish1 के द्वारा
    June 18, 2012

    उमेश जी आपसे आग्रह है…..आप कहानी का अगला भाग देखें……. ऐसी ये कैसी तमन्ना है….२ धन्यवाद……!

vikasmehta के द्वारा
June 15, 2012

pritish ji likhte rahiye meri shubhkamnaye apke sath hain

    pritish1 के द्वारा
    June 18, 2012

    मित्रवर…….मैंने आपके आज ४ लेख पढ़े और मैं आपके सभी लेखों से प्रभवित हूँ….. आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें…………. आशा है…….हम सदैव गतिमान रहें……..आपका नवीनतम मित्र………प्रीतीश

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 28, 2012

प्रीतीश जी, सप्रेम ! आप की इस कहानी को पढ़कर मुझे ‘ अखबार में नाम ‘शीर्षकीय कहानी याद आ गयी जो कभी अपने विद्यार्थी -जीवन में नौवीं- कक्षा में पढ़ा करता था | हालाकि इसकी मौलिकता भी नकारी नहीं जा सकती ! पुनश्च !!

    pritish1 के द्वारा
    June 8, 2012

    आचार्य विजय जी प्रणाम आशा करता हूँ आपको मेरी रचना अच्छी लगी हो मैं इसका अगला भाग आज प्रकाशित करूँगा आप अवश्य पढियेगा……..मैं अपनी रचनाओं को और अच्छा बना सकूँ…इसलिए अपने विचारों से मुझे अवगत करायें धन्यवाद !

Arvind Kumar के द्वारा
May 13, 2012

अच्छा लेखन …जारी रखिये …

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 12, 2012

पर फिलहाल  अपना ध्यान केवल लिखने पर ही दें….. यहाँ चर्चा मिलना आपके लेखन पर निर्भर है….. आपकी लेखनी लोगों को खुद आप तक आने को विवश कर देगी…..

sadhna के द्वारा
May 12, 2012

प्रीतीश जी, लिखते रहिये आप….. कमेंट्स और likes खुद ब खुद आने लगेंगी….. :)

    pritish1 के द्वारा
    May 12, 2012

    थैंक्स साधना जी…..आपके उपयुक्त सलाह के लिए

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
May 12, 2012

आपने बुलाया और हम चले आये | बढ़िया लेखन | आगे के लिए उत्सुक हूँ |

yogi sarswat के द्वारा
May 12, 2012

मित्र प्रतिष् जी ! किन्तु जीवन उन्ही लोगों का होता है ,जो मर कर भी अपना नाम जिन्दा छोड़ जाते हैं……..गुरुदास के सिसकते ह्रदय को एक और चोट पहुंचा देता…………………… अधिकाँश सामान्य बुद्धि छात्रों के मानस पर लिखा आलेख बहुत अच्छा है अक्सर होशियार या फिर कमजोर छात्रों पर ही लिखा जाता है बहुत बढ़िया आगे भी यही उम्दा लेखन पढने को मिलेगा ऐसी आशा है.! अच्छा लेखन !

    pritish1 के द्वारा
    May 12, 2012

    थैंक्स….योगी सारस्वत जी………….मेरे अगले आलेख को अवश्य देखिएगा “ऐसी ये कैसी तमन्ना-२” आने वाले दिनों मे मैं पोस्ट करूँगा……..कमेंट्स वोट और like कर अपना सहयोग बनायें रखें

akraktale के द्वारा
May 12, 2012

अधिकाँश सामान्य बुद्धि छात्रों के मानस पर लिखा आलेख बहुत अच्छा है अक्सर होशियार या फिर कमजोर छात्रों पर ही लिखा जाता है बहुत बढ़िया आगे भी यही उम्दा लेखन पढने को मिलेगा ऐसी आशा है.

    pritish1 के द्वारा
    May 12, 2012

    थैंक्स….…….मेरे अगले आलेख को अवश्य देखिएगा “ऐसी ये कैसी तमन्ना-२” आने वाले दिनों मे मैं पोस्ट करूँगा……..कमेंट्स वोट और like कर अपना सहयोग बनायें रखें

pritish1 के द्वारा
May 11, 2012

आपने मेरा आलेख पढ़ा इसके लिए धन्यवाद………….मैं ‘ऐसी ये कैसी तमन्ना’ का अगला आलेख जल्द ही प्रकाशित करूँगा……………..पढियेगा जरुर ‘ऐसी ये कैसी तमन्ना-२’ अच्छा लगा तो like comments aur vote अवश्य करें………..

चन्दन राय के द्वारा
May 11, 2012

मित्रवर , आपके अगले भाग और तमन्ना का इन्तजार रहेगा सुन्दर आलेख

prashantam के द्वारा
May 11, 2012

good work pritish ji………….namastay

prashantam के द्वारा
May 11, 2012

nice one pritish ji……..welldone….agle bhag main gurudas ka kya hoga…….main janne ke liye utsuk hoon jaldi post kijiye

rick के द्वारा
May 11, 2012

मैं वेट करूँगा आपके और एक पोस्ट का ……..थैंक्स तो शेयर यौर रचना

rick के द्वारा
May 11, 2012

maza aaya ………. mast hai

vinaykumarr के द्वारा
May 10, 2012

i wait for your next post ‘aisi ye kaisi tamanna hai….’

Jamuna के द्वारा
May 10, 2012

बहुत अच्छी रचना धन्यवाद

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 10, 2012

बहुत ही रोचक और सत्य कहानी है .. गुरुदास … जैसे कई बच्चो की तमन्ना पूरी नहीं हो पाती …


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