namaste!

वन्दे मातरम........!!

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pritish1


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हिंदी है मेरे हिन्द की धड़कन

Posted On: 5 Nov, 2013  
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social issues में

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पता नहीं क्यूँ………??

Posted On: 19 Nov, 2012  
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****भारत का स्वर्णिम अतीत ***

Posted On: 28 Oct, 2012  
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वर्त्तमान शिक्षा प्रणाली…….गुलामी का षड्यंत्र

Posted On: 22 Sep, 2012  
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हम स्वतंत्र नहीं है ?

Posted On: 15 Aug, 2012  
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उठो जागो क्यूँ सो रहे हो……..!

Posted On: 8 Aug, 2012  
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सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…….!

Posted On: 28 Jul, 2012  
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हँसते रहिये…… मुस्कुराते रहिये…..!

Posted On: 21 Jul, 2012  
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क्यों बनाया हमने ऐसा समाज……….?

Posted On: 7 Jul, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

रिटेन के निवासी जब बार्बर और जंगली जानवरों की तरह से जीवन बिताते रहे तब भारत में दुनिया का सबसे बेहतरीन कपड़ा बनता था और सारी दुनिया के देशों में बिकता था। वो कहता है की मुझे ये स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है की “भारतवासियों ने सारी दुनिया को कपड़ा बनाना और कपड़ा पहनना सिखाया है” और वो कहता है की हम अंग्रेजों ने और अंग्रेजों की सहयोगी जातियों के लोगों ने भारत से ही कपड़ा बनाना सीखा है और पहनना भी सीखा है। फिर वो कहता है की रोमन साम्राज्य में जीतने भी राजा और रानी हुए हैं वो सभी भारत के कपड़े मांगते रहे हैं, पहनते रहे हैं और उन्हीं से उनका जीवन चलता रहा है।” गज़ब की ऐतिहासिक जानकारी देता लेखन दिया है आपने ! सच में भारत का अतीत जितना सम्रध था , वर्तमान उतना ही बेकार

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

"क्रांति का अर्थ होता है अतीत और भविष्य के बीच एक जबर्दस्त संघर्ष.........................।" ............और उग्रवाद का आतंकवाद उस प्रवृति का परिणाम है जिसके अंतर्गत कुछ लोग अपने मानवीय या अमानवीय मांगों के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं............और ये सब खुद को क्रांतिकारी ही बताते हैं पर जो इससे पीड़ित होते हैं वो इन्हें उग्रवादी और आतंकवादी इत्यादि का नाम देते हैं..............मानव इतिहास का अध्ययन करने पर पता चलता है कि न्यायाय और व्यवस्था कायम करने के लिए हजरों बार रक्त संहार किया गया और आज भी यह कायम है.............निश्चय ही सशत्र क्रांति से व्यवस्था बदल जाती है परन्तु व्यवस्था को चलाने वाला मानव स्वभाव नहीं. अतः यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है...............अतः पुरे विश्व में एक ऐसे क्रांति कि जरूरत है जो वैचारिक हो, मानसिक हो, बौद्धिक हो,........जो अब तक बड़े पैमाने पर घटित नहीं हुआ.............

के द्वारा: अन्जानी- अनिल अन्जानी- अनिल

भारत के स्वर्णिम अतीत तथा वर्तमान वसंगति पर उद्धरणों से पुष्ट, अत्यंत विचारणीय, प्रभावी, शोधात्मक प्रलंब आलेख; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "आज से 150 वर्ष पहले तक भारत चिकित्सा, तकनीक, विज्ञान, उद्योग, व्यपार सबसे दुनिया में शीर्ष पर रहा है और इन सबका श्रेय भारत की शिक्षा व्यवस्था को जाता है, जो दुनिया में सबसे ऊंची थी। ऐसा अदभूत ‘हमारा भारत’ देश अंग्रेजों के आने से पहले तक था। अंग्रेजों की नीतियों और क़ानूनों के कारण आज भारत ऐसा देश बन गया है जहाँ भय भूख बीमारी निर्धनता अन्याय अपराध अत्याचार भ्रस्टाचार लूट एक ऐसा देश जिसका अपना अस्तित्व संकट में है। इसका एकमात्र कारण है गुलामी की शिक्षा व्यवस्था ‘INDIAN EDUCATIONAL ACT"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आपकी भावना सही है पर तर्क नही अंग्रेजो से पहले कितने जुलम  हुए  बता नही सकते उनके सामने  अंग्रेजो के जुलम आधे थे हिन्दू औरतो कोअरबके  बाजारो मे बेचा गया उनसे  बलातकार  आम था   गर्भवतीयो के पेट मे चाकू मार दिए गए अपनी बहन बेटी को ब्याह कर बेशर्मो की तरह पडे रहे ये मार्शल कौम  लोगो को दिल भर करलूटा   जजिया लगाया गया  आज भी मुसलिमो के गर्भ से मरने तक का खरचा टैकस रूप मे हिन्दू दे रहे है  इस देस मे हिन्दू जलूस तक नहीं निकाल सकते हैदराबाद मे2012मे राम नवमी का जलूस मना कर दिया था कासमीर से हिन्दू भगा दिए असम मे क्या हो रहा है सब गान्धी नेहरू की कारसतानी है जिस गन्धी को आदर्श बता रहे हो वह 1944 मे ही स्वराज का नारा छोड चुका था जिस पर मैडलीन सलैड मिली जवाहर लाल का नाम उसी ने  आगे किया था स्वदेसी हो भी गये तो ये सैकुलर रूपी गदार हिन्दुओ को उभरने नही देगे इस का इन्तजाम गान्धी 20 करोड मुसलिम यहां रख कर कर गया गान्धी नेहरू दोनो को पता था कि नेता जी कहां था एक भी इनकवायरी रिपोर्ट जाहिर न हुई  हिन्दू 1500 साल सेगुलाम थे गुलम  हैं गुलाम रहेंगे  जातिप्रथा छूत सेकुलरपना दूर हुए बगैर उध्दार नही युपी मे रामदेव नेप्रचार किया मुलायम का राज आ गयावहां हिन्दुओ की हालत पता करो आख खुल जायेंगी  मौलवियो की तनखा क्यो मुसलिम बचचो के वजीफे क्यो रामदेव ने इतना पैसा जोड लिया किसी गरीब हिन्दू  की सहायता की हो तो एक का ही नाम बता दोये मोडे- शंकराचार्य हिन्दुओ पर जोंक हैं ये ही बता दो किस  मुसलमान ने ऱामदेव को दान दिया है या रक्षा फण्ड मे दिया है  रामदेव की कमांड की महत्वकांक्षा है बस  एक बार बुखारी अन्ना के आन्दोलन पर बोला और फूक सरक गई केजरीवाल किरन आदि पूंछ हिलाते वहां गये ये क्या है  रामदेव गान्धी की समाधी पर क्या लेने जाता है ये हमे मनसिक गुलामी नहीं  तो और क्या दे रहा है  परिवर्तन जरूरीहै पर आदर्श बदलो मेरी प्रतिक्रिया ध्यान से पढो होस के तो अपने बाबा को भी बतादेना कि तेरा  लक्ष्य सही पर आदर्श गलत है जयहिन्द

के द्वारा: snsharmaji snsharmaji

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: pritish1 pritish1

लूट लिए पटवारी ने , वे बेचारे , जनतंत्र -तिरंगा क्या जानें ? बोलने की ही नहीं जीने और भूखे न मरने की भी आजादी होनी चाहिए , झंडे लहराने और लाल किले से लफ्फाजी करने से आजादी का कोई अर्थ नहीं —–अहलुवालिया के टायलेट में तीस लाख का टाइल और दूसरे भारतीय को तीस रूपये रोज पर मर मर के जीती जिन्दगी , क्या हमे शर्म नहीं आती इस आजादी के जश्न पर …..पूरी आजादी चाहिए …..पूरी आजादी मुबारक हो …..जबतक भ्रष्ट नेताओं /अफसरों को जेलों में न डाला जाय , आजादी नहीं, हम इन नेताओं और अपनी ही कायरता के गुलाम हैं ,,,,, प्रसिद्ध और वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट के वकील राम जेठ मालानी ने रामदेव की सभा में घोषणा की है कि – राहुल गाँधी और मनमोहन के आधे मंत्रियों का काला धन विदेशों में है ? आपने सही कहा प्रीतिश जी , ये सत्ता का हस्तांतरण ही था ! सच तो ये है की हम आज भी गुलाम ही हैं क्योंकि ब्रिटिश महारानी , हमारी प्रथम नागरिक हैं ! बेहतरीन लेख

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: nishamittal nishamittal

. जिनके पास न रोटी है . न वस्त्र , न शिक्षा है , न छत , उनसे क्या पूछिए , क्या है स्वतन्त्रता दिवस , स्वतंत्रता दिवस तो मनमोहन को लिखा है , जो लालकिले पर तिरंगा फहराएंगे या कि प्रणव मुखर्जी जिनकी लाटरी लगी है ........... पिंजड़े में बंद परिंदों को वास्ता क्या ? इन झमेलों से, चमन में कब खिजां आई , चमन में कब बहार आई। भूखे प्यासे , शोषितों को जिनक ी मिहनत - मजदूरी के पैसे . लूट लिए पटवारी ने , वे बेचारे , जनतंत्र -तिरंगा क्या जानें ? बोलने की ही नहीं जीने और भूखे न मरने की भी आजादी होनी चाहिए , झंडे लहराने और लाल किले से लफ्फाजी करने से आजादी का कोई अर्थ नहीं -----अहलुवालिया के टायलेट में तीस लाख का टाइल और दूसरे भारतीय को तीस रूपये रोज पर मर मर के जीती जिन्दगी , क्या हमे शर्म नहीं आती इस आजादी के जश्न पर .....पूरी आजादी चाहिए .....पूरी आजादी मुबारक हो .....जबतक भ्रष्ट नेताओं /अफसरों को जेलों में न डाला जाय , आजादी नहीं, हम इन नेताओं और अपनी ही कायरता के गुलाम हैं ,,,,, प्रसिद्ध और वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट के वकील राम जेठ मालानी ने रामदेव की सभा में घोषणा की है कि - राहुल गाँधी और मनमोहन के आधे मंत्रियों का काला धन विदेशों में है ? इसपर कांग्रेस का बडबोला प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी जो रामदेव के मुखौटे कीब ात कर रहा था कल ..............अपने भ्रष्ट युवराज के मुखौटे के बारे क्या कहता है .?.....हिम्मत हो तो जेठमलानी जी को अपोज़ करे , चुनौती स्वीकार करे या दे .......पालतू कुत्ते भूंकते ज्यादा हैं , ए जमीर बेंचकर अमीर हो गये हैं और गलियों की वजाय गाड़ियों में घुमते हैं , राम देव सबको जेल भजेंगे .

के द्वारा: अजय यादव अजय यादव

प्रीतिश जी , धन्यवाद आपने मेरे विचारों सहमती जाहिर की और साथ हीं बाबा रामदेव के आन्दोलन से जुड़ने का आह्वान भी किया आशा है आप भी टेलीविजन देख रहें होंगे वर्तमान भ्रष्ट सरकार बाबा रामदेव को फेल करने की पूरी तय्यारी कर रखी है उनको संसद जाने से रोक रही है दिल्ली की पुलिस द्वारा धारा १४४ लगा दी गयी है , लेकिन ज्यूँ ज्यूँ सरकार का रवैया इसके विरोध का या रोकने का होगा यह आन्दोलन उतना देश ब्यापी होता जायेगा ऐसा मेरा विचार है और उम्मीद की जा सकती है की बाबा रामदेव पिछली बार की तरह डरकर भागेंगे नहीं उनको पूरा जन समर्थन मिल रहा है और मिडिया भी उनका भरपूर साथ देता दिखाई पड़ रहा है चलिए हम भी नारा लगायें "देश को भ्रष्टाचार से बचाना है और विदेशों में पड़ा काला धन वापस देश को दिलाना है " जैहिंद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रितीश जी, आपके विचारों से बहुत ही प्रभावित हूँ। काश ऐसे ही विचार इन आन्दोलनों  के जनको के होते। काश ये लोग अपनी महत्वाकांक्षा के लिये आन्दोलन न  करते। दोंनों ही आन्दोलन केवल एक दूसरे की रणनीतियों  को असफल करने का प्रयास कर रहे है। ये पब्लिक है सब  जानती है। सबके गुप्त एजेन्डें है। क्षमा चाहता हूँ यह आन्दोलन मुझे पारदर्शी नहीं दिख रहे। बहुत दुख हुआ दोंनो आन्दोलनों के गुप्त ऐजेन्डों के समझने के बाद। फिर भी आन्दोलनों का तो समर्थन है, लेकिन व्यक्तियों  का नहीं। दोंनो आन्दोलनों में व्यक्तिवाद हावी है। इस क्राँतिकारी आलेख को जरूर पढ़े- मैं ही हिन्दु. मैं ही मुस्लिम http://amanatein.jagranjunction.com/2012/08/10/12/

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: tejwanig tejwanig

के द्वारा: ajaykr ajaykr

के द्वारा: ambric04 ambric04

आप अब भी समझ नहीं पा रहे हैं क्यूंकि आप भारतीय संस्कृति से पूर्णत: अपरिचित हैं मैं किसी पर दोषारोपण नहीं कर रहा हूँ............मैं तो दोष सम्पूर्ण व्यवस्था को दे रहा हूँ जो हमारी है ही नहीं........और आज यही कारण है की alopathy आयुर्वेद पर प्रभावी है किन्तु यदि गुणवत्ता देखि जाये तो आयुर्वेद से ऊपर कोई है ही नहीं........फिर हमें alopathy को अपनाने की क्या आवश्यकता पड़ी......तर्कहीन बातें आप कहें जा रहे हैं भारतीय संस्कृति के विषय में सामान्य सी कोई पुस्तक ही आप पढ़ लीजिये या समय है तो पूज्यनीय श्री राजीव दीक्षित के दिए गए व्याख्यान सुन लीजिये आपको मेरी बात समझ में आ जाएगी............बेकार के तर्क मत दीजिये.........क्यूंकि आप पैसों में सब तौलते हैं क्यूंकि लोर्ड मेकोले की शिक्षा यही सिखाती है और हमारी संस्कृति में राष्ट्रहित सर्वोपरि है ............मैंने आपका विरोध किया ही नहीं मैंने अपनी संस्कृति को सर्वोपरि कहा है..........और भारतीय संस्कृति सर्वोपरि है.......और हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान.........

के द्वारा: pritish1 pritish1

ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..9 अगस्त दिल्ली चलो…….! 9 अगस्त को एक अन्तिम अल्टीमेटम, एक अन्तिम मौक़ा देंगें ये किसी भी आन्दोलन का एक चरण होता है परिवर्तन कोई भी कितना भी बड़ा हुआ हो पूरी दुनिया में उसे इस चरण से गुजरना ही पड़ता है और अबकी बार उन्हें अन्तिम मौक़ा दिया जा रहा है और कि तुम कालाध न लाओ ,भ्रष्टाचार मिटाओ देश को बचाओ और यदि तुम कालाधन लाते हो भ्रष्टाचार मिटाते हो देश को बचाते हो तो तुम्हारा स्वागत है यहाँ से शुरू होगा 9 अगस्त का आन्दोलन इसी वाक्य से शुरू होगा इसी विचारधारा से शुरू होगा इसी संकल्प के साथ शुरू होगा इसी आइडियोलोजी के साथ शुरू होगा इसी सिद्धान्त के साथ शुरू होगा के अब अन्तिम अल्टीमेटम है कि या तो अब लाओ और यदि तुम लाते हो तो हम तुम्हे श्रेय देने के लिए तैयार हैं और यदि तुम नहीं ले कर के आते हो कालाधन नहीं मिटाते हो भ्रष्टाचार नहीं बचाते हो देश को तो ये देश किसी सत्ता किसी पार्टी या किसी एक कुल, खानदान,घराने का नहीं है ये हम 121 करोड़ भारतियों का देश है और इसको बचाने के लिए हम इस देश में आ गए है हमारा वतन हमारे दिल में बस्ता है ये हमारे लिए माँ है और हम इसकी सन्ताने हैं हम इसकी बैटा-बेटियाँ हैं ,हम अपनी माँ की इज्जत आबरू को बर्बाद नहीं होने देंगें ! यहाँ से शुरू होगी ये प्रक्रिया ...:- Swami Ramdev

के द्वारा: pritish1 pritish1

समस्या बस मेरी और आपकी नहीं है की स्वयं मैं परिवर्तन लाकर हम उसे सुलझा सकें.............समस्या सम्पूर्ण भारत की है..........सेकड़ों वर्षों की गुलामी और अंग्रेजों के षड़यंत्र ने हमारी संस्कृति को मार दिया है.........किन्तु हमारी संस्कृति अब भी जीवित है........स्वामी रामदेव के प्रयासों से यह पुन: एक नए वेग से उर्जावान होने लगी है............अपनी संस्कृति और भारत के लिए कुछ करूँ यह मेरा कर्तव्य है ......और मैं अपने कर्तव्य का पालन करने का प्रयत्न कर रहा हूँ.........किन्तु आपको क्या पड़ी है..........आप तो डॉक्टर बनने वाले हैं......आप तो बस अपनी संस्कृति के विषय मैं ही मुझसे ५० प्रश्न पूछेंगे......और आपको संतोषजनक उत्तर देने के बाद भी...........बाजारवाद की संस्कृति को सही कहेंगे.........और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आपने जो भी कहा है उसका कारण केवल और केवल अंग्रेजों का षड़यंत्र और बाजारवाद है.........आज समाज भ्रस्ट लोगों से भर गया है रोगियों से भर गया है...........आयुर्वेद मृतप्राय है............और हमारा यही तो प्रयास है की हम अपनी संस्कृति को पुन: विश्व की महाशक्ति बनाये...........हम सबको बदलना नहीं चाहते सबमे सबके मानसिक चिंतन में बदलाव लाना चाहते हैं............हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! पुन: भारत विश्वगुरु बनेगा…….हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति से……… यह हमारा कर्तव्य है और मैं अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हूँ.........किन्तु आप भाग रहे हैं अपने कर्तव्य से...मैं कैसे भाग जाऊं.....नहीं भाग सकता......आपने ज्ञान देने का प्रयत्न किया इसका धन्यवाद....... जय हिंद जय भारत…….जय भारत स्वाभिमान………. प्रीतीश

के द्वारा: pritish1 pritish1

प्रीतीश जी, ||आपके कथनानुसार || अगर मैं सच में चिकित्सक बनना चाहूँ  तो आयुर्वेद पढूं क्या बात हैं ,आजतक एक भी आयुर्वेदिक सर्जन मुझे नही मिला ,किडनी सर्जरी ,हार्ट सर्जरी ,न्यूरो सर्जरी का कोई आयुर्वेदिक सर्जन नही मिला |आपने लिखा हैं की मैं जों पढ़ रहा हूँ ,बाजारवाद हैं फिर आप एम्स के सामने तथाकथित योगियो को लेकर आने वालो मरीजो को रोको ....तथाकथित आयर्वेद चिकित्सको के खराब किये हुए केसों मृतप्राय ..रोगियो की सर्जरी मत होने दो....हिम्मत हैं तुम्हारी इस बाजारवाद को रोकने की?किस किस को मारोगे .और आयुर्वेद को बदनाम करोगे |.तुम्हारी तरह के ही लोग जब हार्ट अटैक से मृत्यु के मुह में पहुँचते हैं तो किसी तथाकथित आयुर्वेदिक चिकित्सक .के पास जाने की बजाय एम्स क्यों आते हैं ?जवाब दो क्यूँ नही खड़ी करते बिना बाजार वाद के चिकित्सको की फ़ौज |..आयुर्वेद का अपना महत्व हैं जैसे की हर चिकित्सा प्रद्धात्ति का होता हैं ..... हमारी संस्कृति महान हैं ......हैं ना ?सरेआम गुवाहाटी में संस्कृति के पुरोधा किसी बच्ची के साथ घिनौनी हरकते करते हैं ?तब तुम कहाँ गए थे |सरेआम नेता,तथाकथित नकली साधू संत ,अफसर बेईमानी करते हैं ,देवियों के पूजने वाले इस देश में देवी रूपेण महिलाओं के साथ बदसलूकी क्या यह भी हमारी संस्कृति में हैं? | तुम सबको बदलना चाहते हों??????????????मेरी मानो खुद से बदलाव शुरू करो??दूसरों को तुम नही बदल सकते ,बदल सकते हों तो केवल खुद को.....?????????

के द्वारा: ajaykr ajaykr

आदरणीय अजय जी, आप अब तक मेरे वाक्य ही समझ नहीं पाए हैं.......मैंने आपसे कोई प्रश्न किया ही नहीं आपने उत्तर दे दिए ....हो सकता है आप मेरी बात समझना नहीं चाहते आपकी आँखों में भ्रष्ट आधुनिकता की पट्टी जो बंधी है आपको अपने सभी प्रश्नों का उत्तर मिल जायेगा........बाजारवाद की इस भ्रस्ट आधुनिकता की पट्टी को उतार फेंकिये.............किन्तु मैं आपको निराश नहीं करूँगा चरणबद्ध रूप से आपके प्रश्नों का उत्तर लिख रहा हूँ...... १. आपका पहला प्रश्न भारतीय संस्कृति क्या है? 4 वेद, 4 उपवेद, 6 वेदांग, 18 पुराण, अशंख्य उपनिषद (108 मान्यताप्राप्त) न्याय, मीमांशा, धर्मशास्त्र, ................आदि आदि......इतनी और इससे भी बड़ी है भारतीय संस्कृति किसी कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर विश्व की किसी मशीन में इतनी क्षमता नहीं की भारतीय संस्कृति का पूर्ण संग्रहण कर सके.........भारतीय संस्कृति को समेटना अशंभव है यदि किसी एक भाग को भी जान लिया तो जीवन सार्थक हो जाता है......संक्षेप में इतना ही कहूँगा अपनी संस्कृति के विषय में....... "वशुधैव कुटुम्बकम......!" आप किसी ज्ञानी से बस इन दो शब्दों का पूर्ण अर्थ पूछ लीजिये वो एक ग्रन्थ की रचना कर देंगे........इतनी शक्ति है हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति में......... २.आपका भ्रम भ्रस्ट लोगो द्वारा फैलाई गयी भ्रांतियां और षड़यंत्र........ आप जिस विषय की पढाई अभी कर रहे हैं वो आयुर्वेद से उत्पन्न हुआ है........ऋग्वेद का उपवेद है आयुर्वेद...! आप जो पढ़ रहे हैं वो बाजारवाद के लिए है आज की भ्रस्ट आधुनिकता है जो अंग्रेजों ने बनायीं है....... यदि सच में चिकित्सक बनना चाहते हैं तो आयुर्वेद पढ़िए.........स्वामी जी की कौन से डिग्री है किन्तु वो विश्व में उपस्थित सभी चिकित्सकों से महान है.....सम्पूर्ण विश्व में उनके चाहने वाले हैं.....उन्होंने पुन: भारतीय संस्कृति को जागृत करने का सफल प्रयत्न किया है और सम्पूर्ण विश्व उनके साथ है आपने जो भी उनके विषय में कहा है वो भ्रस्ट लोगो द्वारा फैलाई गयी भ्रांतियां है षड़यंत्र है भ्रम है आप भ्रम में रहिये........स्वामी जी मेरे और सम्पूर्ण विश्व के लिए पूज्य हैं और रहेंगे........ 3. शिक्षा के सभी प्रारूप संस्कृत से उत्पन्न हुए हैं और आने वाले वर्षों में भारत पुन: वैदिक शिक्षा का आधार बनेगा..........शिक्षा पाने के लिए किसी को संघर्ष नहीं करना होगा........एक बड़ा परिवर्तन आएगा सम्पूर्ण जगत में.........हम संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित कर देश में एक नई आजादी, नई व्यवस्था एवं नया परिवर्तन लायेंगे और भारत को विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति बनायेंगे। यह हमारी दृढ संकल्पना है…….! पुन: भारत विश्वगुरु बनेगा.......हमारी संस्कृत और हमारी संस्कृति से......... जय हिंद जय भारत.......जय भारत स्वाभिमान..........

के द्वारा: pritish1 pritish1

अजय जी नमस्ते...... योग के विषय में आपका ज्ञान अधूरा है इसका कारण आपकी और हम सब की शिक्षा है जो अंग्रेजों द्वारा हम सब पर आजादी के नाम पर थोप दी गयी है.......हमारा दुर्भाग्य है की हम अपनी ही भारतीय संस्कृति के विषय में आज तक कुछ सिख नहीं पाए हैं......और यही आपकी और पुरे भारत की अज्ञानता का कारण है....... योग सर्वत्र समर्पण है.......एक सच्चा योगी बेईमानी, भ्रष्टाचार, हिंसा, अपराध, असंवेदनशीलता, अकर्मण्यता, अविवेकशीलता, अजितेन्द्रियता, असंयम एवं अपवित्रता की पहुँच से बहुत दूर होता है.......योगी न होने से आत्मविमुखता पैदा होती है और आत्मविमुखता का ही परिणाम है – बेईमानी, भ्रष्टाचार, हिंसा, अपराध, असंवेदनशीलता, अकर्मण्यता, अविवेकशीलता, अजितेन्द्रियता, असंयम एवं अपवित्रता । आज समाज में योग करने वाले बढे हैं किन्तु योगी नहीं.......... हम देश के प्रत्येक व्यक्ति को प्रथमत: योगी बनाना चाहते है और जब देश का प्रत्येक व्यक्ति योगी होगा, तो वह एक चरित्रवान युवा होगा, वह देशभक्त, शिक्षक व चिकित्सक होगा, वह विचारशील होगा, वह संघर्षशील अधिवक्ता होगा, वह जागरूक किसान होगा, वह संस्कारित सैनिक, सुरक्षाकर्मी एवं पुलिसकर्मी होगा, वह कर्तव्य – परायण अधिकारी, कर्मचारी एवं श्रमिक होगा, वह ऊर्जावान व्यापारी होगा, वह देशप्रेमी कलाकार होगा, वह राष्ट्रहित को समर्पित वैज्ञानिक होगा,वह स्वस्थ, कर्मठ एवं अनुभवी वरिष्ठ नागरिक होगा एवं वह संवेदनशील न्यायाधीश-अधिवक्ता होगा क्योंकि हमारी यह स्पष्ट मान्यता है कि आत्मोन्नति के बिना राष्ट्रोन्नति नहीं हों सकती । ध्यान से पढें नहीं तो आपको मेरी बात शायद समझ में न आये..........और कोई शंका है तो मैं उसे १००% दूर करने का प्रयत्न करूँगा....... प्रीतीश

के द्वारा: pritish1 pritish1

प्रीतीश जी,मैं योग का विरोधी नही हूँ ,योग करने से लोग सुधरते तो दिनों दिन अराजकता /अशांति /चोरी/हत्या / की घटनाये बढ़ती नही ...जबकि आकडे बताते हैं की योग करने वाले दिनों दिन बढ़ रहें हैं ,दिल्ली के किसी भी रिहायसी कालोनी से आप सुबह गुजरोंगे तो सुबह सुबह फूं फ .....कपल बहती,अनुलोम विलोम आदि करने वाले तथा सुर्नाम्स्कार ,सर्वांगासन ,हलाशन करने वालो की एक बड़ी संख्या देखेंगे | सिर्फ योग करने से ही रोग मिटते तो आज हमारे अस्पताल में इतने रोगी नही आतें .....जो की दिनों दिन बढ़ रहें हैं | हा स्वामी का प्रयास सार्थक जरूर हैं .......कोको...पेप्सी ...जैसे जहरो की बिक्री में आई कमी .....हैं ,योग करने से चरित्र का सम्बन्ध मेरे समझ में नही आया ................जरूर समझाईये | एक माँ को आदर्श माँ योग कराके बनायेंगे थोड़ी बात समझ में नही आई .......माँ की UNCONDITIONAL LOVE में कंडीशन उत्पन्न करेंगे क्या ?????? मैं ऐसे अनेक पुलिस अफसरों ,डाक्टरों,अस्पताल मालिकों को देख चुका हूँ जो हर दिन योग करते हैं किन्तु घर लौटते हैं रात को तो उनके बैग गरीबो,कमजोरों के खून बेचकर कमाए हुए रुपये से भरे होते हैं ...... जो भी हों योग एक सार्थक चीज हैं और हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी,मुझे अच्छा लगता हैं इसलिए योग करता हूँ ......किन्तु मेरा स्वास्थ्य मेरे मस्तिष्क के नियंत्रण में हैं ...मेरा धन ,मेरा चरित्र ,मेरी सहिद्र्यता ,मेरी इमानदारी,मेरी खुद को और दूसरों को धोखा ना देने की प्रवृत्ति मेरे अपने मन के नियंत्रण में हैं |

के द्वारा: ajaykr ajaykr

के द्वारा: pritish1 pritish1

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प्रिय प्रीतिश जी बहुत सुन्दर टिप्स और सच्चाई बयान की आप ने ..आधा दर्द तो यों ही काफूर हो जाता है जब हंसी आये दिल का दौरा पड़े तो हाथ ऊपर उठाओ और जोर से हंस दो या हंसा दो हार्ट अटैक बच जाएगा ...बाकी सब तो आप ने लिखा ही है पल भर में नयना चार हों मुस्कुराहट बिखर जाए तो लहर दौड़ जाती है दिल में खून का संचार तारो ताजा बहुत कुछ ...बाकी आप की बातें मै भी दोहराता हूँ जी से हंसो आपको अच्छा लगेगा…….अपने मित्र को हंसाओ वह अधिक प्रसन्न होगा…….. शत्रु को हंसाओ आपसे कम घृणा करेगा…….. एक अनजान को हंसाओ आप पर भरोसा करेगा……. उदास को हंसाओ वह मुश्कुरायेगा, किसी निराश को हंसाओ उसमे आशा उत्पन्न होगी………. एक बूढ़े को हंसाओ वह स्वयं को जवान समझेगा……. बालक को हंसाओ वह स्वस्थ रहेगा, युवक को हंसाओ उसमे आत्मविश्वास का प्रवाह होगा…

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

के द्वारा: deepaksharmakuluvi deepaksharmakuluvi

प्रीतिश जी नमस्कार, आपके साथ बहुत दूर तक मै सहमति लिए नहीं चल सकता क्योंकि हमारे यहाँ अच्छे काम करने वाले का नाम होता है और बुरा काम करने वाले का नाम बदनाम होता है. आप भ्रमित इसलिए हैं की हमारा मीडिया प्राथमिकता उसको देता है जो बिकता है. आप इस तरह समझें की यदि आप बाजार में एक तरफ स्राजनशील साहित्य और एक तरफ अश्लील साहित्य विक्रय के लीये लेकर बैठेंगे तो स्रजनशील साहित्य के खरीददार यदा कडा ही मिलेंगे जबकि अश्लील साहित्य हाथों हाथ बिक जाएगा. हमारा मीडिया भी इसी से प्रेरित है.आपका कहना की गलती उसी से होगी जो कुछ काम करेगा बिलकुल सही है. हमारा समाज आज भी अच्छाई को ही महत्त्व देता है मगर मुश्किल ये है की यह समाज सिकुड़ रहा है.

के द्वारा: akraktale akraktale

मित्र प्रीतीश,सादर अभिवादन , मन वचन और कर्म की एकरूपता ही सच्ची आध्यामिकता हैं |कोई भी महान व्यक्ति यश के लिए कार्य नही करता क्यूंकि जब सिर्फ यश के लिए कार्य किया जाता हैं तो शायद वह इतनी गुणवत्ता का नही हों पता जितनी “कार्य से प्रेम” की भावना से किया गया कार्य होता हैं | जीवन के दो पहलू हैं सकारात्मक या नकारात्मक !और रिमोट हमारे हाथ में हैं |या तो हम सकारात्मक होते हैं या नकारात्मक बिच में कुछ नही हैं | हर व्यक्ति का समाज को देखने का अपना चश्मा होता हैं .कुछ लोगों को लगता हैं की बुरा कार्य करके प्रसिद्द हों सकते हैं जैसे सायको रेपिस्ट ,बड़े चोर ......... कुछ लोग हमेशा अच्छा कार्य करना चाहते हैं ,अच्छाई भी प्रसिध्ही दिलाती हैं भाई ....जैसे बड़े डॉ ,लेखक ,पूर्व राष्ट्रपति कलाम | सच्चाई संघर्ष तो हैं किन्तु स्थायित्व की नीव भी हैं |सच्चाई की बुनियाद पर जो भवन बनता हैं टिकाऊ होता हैं | समर में घाव खाता हैं , उसी का मान होता हैं || छिपी उस वेदना में | अम्र वरदान होता हैं || सृजन में चोट खाता हैं | छेनी और हथोरी से | वाही पाषाण कही मंदिर में | भगवान होता हैं | |हमे जीवन में सिर्फ और सिर्फ वही मिलता हैं जो हम दूसरों को देते हैं |जीवन में आकर्षण का नियम के लिए सिर्फ हम हैं बस |अच्छाई किसी को देंगे ,प्रेम देंगे तो प्रेम का वृक्ष खुद में सर्वप्रथम अंकुरित होंगा | अच्छा लेख ,लिखते रहिये |

के द्वारा: ajaykr ajaykr

के द्वारा: pritish1 pritish1

“आज सुखी वही है जो कुछ नहीं करता,जो कुछ भी करेगा, समाज उसमे दोष खोजने लगेगा उसके गुण भुला दिए जायेंगे और दोषों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जायेगा……प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दोषी है दोष किसमे नहीं होते……आज यही कारण है कि हर कोई दोषी अधिक दिख रहा है गुणी या ज्ञानी किंचित ही दिखाई पड़ते हैं……….”(श्वेत +श्याम रंगों के मिश्रण पर ध्यान देना है रंग हलके उभरे तो बहुत अछा,गहरे उभरे तो आत्मविश्लेषण की ज़रूरत है.)ब्लॉग(जीवन है सरल) प्रीतिश्जी,आपने मेरे ब्लॉग की कुछ पंक्तियों पर खासा ध्यान नहीं दिया.आपके द्वारा पूछे गए प्रत्येक प्रश्न का ज़वाब आपको प्राप्त होगा यह मैं आशा करती हूँ.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: gopaljeesingh gopaljeesingh

के द्वारा: umeshshuklaairo umeshshuklaairo

के द्वारा: prashantam prashantam

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के द्वारा: rick rick




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